किशोरी से दुष्कर्म: अपहरणकर्ता को दस साल की कैद और 50 हजार का जुर्माना
एक कृत्य जिसने समाज को झकझोर दिया है, उसमें न्यायालय ने एक दलित किशोरी के अपहरण और दुष्कर्म के मामले में आरोपी दीपक पाल को दस साल के कारावास और 50 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है। यह फैसला अपर सत्र न्यायाधीश/अतिरिक्त विशेष न्यायाधीश (पोक्सो एक्ट) न्यायालय संख्या दो, ब्रिजेश कुमार की अदालत ने सुनाया।
घटना 29 जनवरी 2018 की है, जब थाना हाइवे क्षेत्र की रहने वाली एक किशोरी को दीपक पाल, जो कस्तला कासमाबाद, थाना पिलखुआ, जिला हापुड़ का निवासी है, बहला-फुसलाकर अपने साथ भगा ले गया था। किशोरी के पिता ने जब अपनी बेटी के लापता होने की सूचना पर जांच की, तो उन्होंने थाना हाइवे में इसकी रिपोर्ट दर्ज कराई।
पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मामले की जांच शुरू की और कुछ ही समय में आरोपी दीपक पाल को गिरफ्तार कर लिया। साथ ही, अपहृत किशोरी को भी सकुशल बरामद कर लिया गया। पुलिस द्वारा किशोरी का चिकित्सीय परीक्षण कराया गया, जिसमें उसके साथ दुष्कर्म की पुष्टि हुई। इस पुष्टि के बाद पुलिस ने आरोपी के खिलाफ पुख्ता सबूतों के साथ न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया।
न्यायालय में मुकदमे की सुनवाई अपर सत्र न्यायाधीश/अतिरिक्त विशेष न्यायाधीश (पोक्सो एक्ट) न्यायालय संख्या दो, ब्रिजेश कुमार की अदालत में हुई। न्यायाधीश ने सभी साक्ष्यों और गवाहों के बयानों को ध्यान में रखते हुए आरोपी दीपक पाल को अपहरण और बलात्कार का दोषी ठहराया। अदालत ने भारतीय दंड संहिता की संबंधित धाराओं के साथ-साथ पोक्सो अधिनियम के तहत आरोपी को दस साल के सश्रम कारावास और 50 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई।
यह भी बताया गया है कि आरोपी दीपक पाल घटना के बाद से जमानत पर बाहर था। निर्णय सुनाए जाने के बाद, न्यायालय ने उसे हिरासत में लेने और जेल भेजने का आदेश दिया। इस सजा से समाज में यह संदेश जाता है कि ऐसे घृणित अपराधों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और न्याय व्यवस्था ऐसे मामलों में त्वरित और कठोर कार्रवाई करती है।
