जेएनयू प्रोफेसर अंगोमचा बिमोल अकोइजम ने यौन उत्पीड़न के आरोपों को नकारा, कहा हुआ मीडिया ट्रायल | jnu news
कांग्रेस के लोकसभा सांसद और जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) के प्रोफेसर अंगोमचा बिमोल अकोइजम ने उनके खिलाफ लगे यौन उत्पीड़न के आरोपों पर अपनी चुप्पी तोड़ी है। उन्होंने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन और कुलपति की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। इस पूरे विवाद के सामने आने से शैक्षणिक संस्थानों में आंतरिक शिकायतों की निष्पक्षता और प्रशासनिक पारदर्शिता को लेकर एक बार फिर बड़ी बहस छिड़ गई है, जिसका सीधा असर उच्च शिक्षण संस्थानों की साख पर पड़ता है।
अपनी बर्खास्तगी के नोटिस की आलोचना करते हुए प्रो. अकोइजम ने आंतरिक शिकायत समिति (ICC) की जांच प्रक्रिया पर सवाल उठाए। उन्होंने बताया कि उन्हें एक ईमेल के जरिए यह सूचना मिली कि जांच बंद हो गई है, जबकि नियमों के अनुसार समिति की रिपोर्ट दोनों पक्षों को सौंपी जानी चाहिए ताकि वे 30 दिनों के भीतर अपील कर सकें। उनका आरोप है कि उन्हें रिपोर्ट दिए बिना ही कुछ ही घंटों के भीतर कुलपति द्वारा बर्खास्तगी का नोटिस जारी कर दिया गया, जो पूरी तरह से मनमाना और नियमों के विपरीत है।
विश्वविद्यालय प्रशासन पर POSH अधिनियम की धारा 16 का उल्लंघन करने का आरोप लगाते हुए सांसद ने कहा कि जांच रिपोर्ट को गोपनीय रखा जाना चाहिए था, लेकिन उनका नाम सार्वजनिक कर दिया गया। उन्होंने दावा किया कि देश भर में और मुख्यधारा के मंचों पर उनका सुनियोजित तरीके से मीडिया ट्रायल किया गया। इसके साथ ही, उन्होंने कुलपति पर अपील की सुनवाई से पहले ही मीडिया में जाकर झूठे और भ्रामक दावे करने का आरोप लगाया है, जिससे उनकी छवि को भारी नुकसान पहुंचा है।
