बेंगलुरु में SIR के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे लोग हिरासत में, डीके शिवकुमार ने दिए जांच के आदेश | bangaluru protest detentions
कर्नाटक की राजनीति में उस वक्त अजीब स्थिति पैदा हो गई जब एक तरफ राज्य के प्रमुख नेता नई दिल्ली में चुनाव आयोग के खिलाफ विरोध मार्च निकाल रहे थे, वहीं दूसरी तरफ उनके अपने ही गृह राज्य में पुलिस ने इसी मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे लगभग 100 लोगों को हिरासत में ले लिया। यह पूरी घटना मतदाता सूची के ‘स्पेशल इंटेंसिव रिविजन’ यानी SIR प्रक्रिया के विरोध से जुड़ी हुई है।
सोमवार को बेंगलुरु में मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय तक मार्च निकालने की कोशिश कर रहे छात्रों, वकीलों, महिला कार्यकर्ताओं और वरिष्ठ पत्रकारों को पुलिस ने रास्ते में ही रोक लिया। आरोप है कि प्रदर्शनकारियों के साथ-साथ वहां कवरेज कर रहे मीडियाकर्मियों को भी पुलिस की सख्त कार्रवाई का सामना करना पड़ा। बिना अनुमति का हवाला देते हुए पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया, जिसके बाद राज्यभर में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली।
इस पूरे घटनाक्रम पर जनता और विपक्षी दलों के बीच तीखी आलोचना शुरू होने के बाद सरकार हरकत में आई। उप मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने स्पष्ट किया कि लोकतंत्र में शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन करने का अधिकार सभी को है और यदि पुलिस ने नियमों से परे जाकर अत्यधिक बल का प्रयोग किया है, तो पूरी स्थिति की रिपोर्ट मंगवाकर सख्त जवाबदेही तय की जाएगी। वहीं, गृह मंत्री प्रियांक खड़गे ने भी पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि भविष्य में शांतिपूर्ण प्रदर्शनों में किसी तरह की अनावश्यक बाधा उत्पन्न न हो।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह की घटनाएं सत्ता पक्ष के दोहरे मानदंडों को उजागर करती हैं, जिससे जनता के बीच लोकतांत्रिक अधिकारों के हनन को लेकर गहरी चिंता पैदा होती है। प्रशासन के इस रुख से नागरिकों के विरोध करने के अधिकार पर सवालिया निशान लग गया है, जिसका असर आगामी राजनीतिक समीकरणों पर भी पड़ सकता है।
