झारखंड निकाय चुनाव: नामांकन पत्रों की जांच अब सिर्फ निर्वाची पदाधिकारी करेंगे, ARO को अधिकार नहीं
झारखंड में आगामी निकाय चुनावों के लिए राज्य निर्वाचन आयोग ने नामांकन पत्रों की जांच प्रक्रिया में बड़ा बदलाव किया है। अब केवल निर्वाची पदाधिकारी (आरओ) ही उम्मीदवारों द्वारा जमा किए गए नामांकन पत्रों की जांच करेंगे। सहायक निर्वाची पदाधिकारी (एआरओ) इस अर्द्धन्यायिक प्रक्रिया में भाग नहीं ले सकेंगे।
आयोग के अनुसार, नामांकन पत्रों की जांच एक महत्वपूर्ण अर्द्धन्यायिक प्रक्रिया है, जिसे केवल निर्वाची पदाधिकारी द्वारा ही संपन्न किया जाना है। यह सुनिश्चित किया जाएगा कि इस जांच में किसी बाहरी वरीय पदाधिकारी या प्रेक्षक का हस्तक्षेप न हो, और अंतिम निर्णय निर्वाची पदाधिकारी का ही मान्य होगा।
हालांकि, उम्मीदवार अपना नामांकन पत्र सहायक निर्वाची पदाधिकारी के समक्ष जमा कर सकते हैं। जांच के समय उम्मीदवार, प्रस्तावक, निर्वाचन अभिकर्ता और एक अधिवक्ता उपस्थित रह सकते हैं, लेकिन उम्मीदवार की व्यक्तिगत उपस्थिति अनिवार्य नहीं होगी। निर्वाची पदाधिकारी को निर्धारित तिथि और समय पर सभी दाखिल नामांकन पत्रों की जांच करनी होगी।
प्रारंभिक जांच के दौरान, निर्वाची पदाधिकारी यह सुनिश्चित करेंगे कि उम्मीदवार और प्रस्तावक का नाम मतदाता सूची में है और सभी आवश्यक दस्तावेज संलग्न हैं। इसके लिए, निर्वाची पदाधिकारी के पास पूरे नगरपालिका क्षेत्र की मतदाता सूची उपलब्ध होनी चाहिए, क्योंकि कोई भी मतदाता किसी भी वार्ड से चुनाव लड़ सकता है।
आयोग ने यह भी निर्देश दिया है कि नामांकन पत्र दाखिल करते समय अधिकतम तीन वाहनों और पांच व्यक्तियों को ही कार्यालय परिसर की 100 मीटर परिधि में प्रवेश की अनुमति होगी। तकनीकी या लिपिकीय त्रुटियों के आधार पर किसी उम्मीदवार का नामांकन रद्द नहीं किया जाएगा, जब तक कि रद्द करने का कोई पर्याप्त आधार न हो।
