झारखंड हाई कोर्ट का कड़ा रुख: जमशेदपुर में अवैध निर्माण पर जेएनएसी को फटकार
जमशेदपुर में पार्किंग और अवैध निर्माण से जुड़े एक मामले में झारखंड उच्च न्यायालय ने जेएनएसी (जमशेदपुर अधिसूचित क्षेत्र समिति) के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है। सूत्रों के अनुसार, उच्च न्यायालय ने जेएनएसी को 46 भवनों के मामले में पुरानी कहानी दोहराने पर फटकार लगाई है।
न्यायालय ने जेएनएसी को अपनी जिम्मेदारी समझने और जनता के हित में काम करने का निर्देश दिया है। अदालत ने जेएनएसी को आईना दिखाते हुए मामले में गंभीरता से कार्रवाई करने को कहा है। राकेश झा बनाम झारखंड सरकार मामले की सुनवाई करते हुए, मुख्य न्यायाधीश और न्यायाधीश राजेश शंकर की पीठ ने जेएनएसी द्वारा बार-बार अधूरी जानकारी देने पर गहरी नाराजगी व्यक्त की।
अदालत ने जेएनएसी के डिप्टी कमिश्नर कृष्ण कुमार को गुरुवार को व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित होने का आदेश दिया है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि क्यों न उनके खिलाफ अदालत की अवमानना की कार्यवाही शुरू की जाए। सूत्रों के अनुसार, अदालत ने पाया कि जेएनएसी ने 17 सितंबर के स्पष्ट निर्देशों का पालन नहीं किया था। अदालत ने जेएनएसी को एक विस्तृत हलफनामा दायर करने का आदेश दिया था, जिसमें पार्किंग पर कब्जा करने वालों और अवैध निर्माण करने वाले बिल्डरों के खिलाफ की गई कार्रवाई का विवरण देना था।
इसके अतिरिक्त, समिति को पूर्णता प्रमाण पत्र (कंप्लीशन सर्टिफिकेट) जारी किए गए और नहीं जारी किए गए भवनों की सूची भी सौंपनी थी। अदालत ने विशेष रूप से उन भवनों की जानकारी मांगी थी जिन्हें बिना पूर्णता प्रमाण पत्र के बिजली और पानी के कनेक्शन दे दिए गए थे और यह भी पूछा था कि उनसे बिजली का बिल वाणिज्यिक दर पर वसूला जा रहा है या सामान्य दर पर।
सूत्रों के अनुसार, बुधवार को जब जेएनएसी ने अपना हलफनामा पेश किया, तो उसमें इन महत्वपूर्ण जानकारियों का कोई उल्लेख नहीं था। इस पर अदालत ने नाराजगी जताते हुए जेएनएसी के अधिकारियों के खिलाफ अवमानना की कार्यवाही की चेतावनी दी। अदालत में मौजूद जेएनएसी के विशेष पदाधिकारी ने दलील दी कि वह नए हैं और मुख्य प्रभार उप नगर आयुक्त कृष्ण कुमार के पास है। इस खुलासे पर अदालत ने हैरानी जताई, क्योंकि यह सीधे तौर पर अदालत को गुमराह करने का प्रयास था।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता अखिलेश श्रीवास्तव ने दलील दी कि जेएनएसी 2011 से ही अदालत के साथ धोखाधड़ी कर रही है। उन्होंने बताया कि जेएनएसी पिछले कई वर्षों से अपने हर हलफनामे में केवल 46 भवनों को सील करने की बात दोहरा रही है, जबकि हकीकत में इन भवनों से सील हटाकर और भी अवैध निर्माण कर लिए गए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि उप नगर आयुक्त कृष्ण कुमार ने पिछले छह वर्षों में लगभग 650 अवैध बिल्डिंग प्लान स्वीकृत किए और उन सभी को बिना पूर्णता प्रमाण पत्र के बिजली-पानी के कनेक्शन भी दिलवाए।
