ईरान-अमेरिका युद्ध का असर: केंद्रीय हिंदी संस्थान में घटे विदेशी छात्र, यूक्रेन-इजरायल से आवेदन नहीं
केंद्रीय हिंदी संस्थान (केएचएस) में नव सत्र 2026-27 के लिए विदेशी छात्रों के आवेदन की संख्या में गिरावट देखी गई है। विशेष रूप से, यूक्रेन, ईरान और इजरायल जैसे देशों से इस बार एक भी छात्र का आवेदन प्राप्त नहीं हुआ है। यह स्थिति बीते समय से चल रहे वैश्विक युद्धों और तनाव का सीधा असर दर्शाती है।
इस बार विदेशी हिंदी भाषा प्रमाणिक पाठ्यक्रम में कुल 150 सीटों के लिए केवल 108 आवेदन प्राप्त हुए हैं। सबसे अधिक 23 आवेदन श्रीलंका से आए हैं, जबकि अन्य देशों से भी कुछ आवेदन मिले हैं। संस्थान के निदेशक हरिशंकर ने बताया कि इन देशों से हर वर्ष विद्यार्थी आते रहे हैं, लेकिन वर्तमान तनाव और हिंसा के कारण दूतावासों से आवेदन प्राप्त नहीं हुए हैं।
कुल मिलाकर, 27 देशों से 108 छात्र इस सत्र में हिंदी सीखने के लिए आएंगे। उनकी प्रवेश प्रक्रिया आगामी चरणों के बाद पूरी की जाएगी। अंतरराष्ट्रीय हिंदी शिक्षण विभाग के पूर्व विभागध्यक्ष प्रो. उमापति दीक्षित ने बताया कि नौ महीने के इन पाठ्यक्रमों का उद्देश्य छात्रों को भाषा, साहित्य और संवाद के तौर-तरीकों में पारंगत करना है, ताकि वे दूतावासों में द्विभाषाई रूप से कार्य कर सकें।
संस्थान चार श्रेणियों में हिंदी भाषा दक्षता पाठ्यक्रम संचालित करता है, जिनमें हिंदी भाषा दक्षता प्रमाण-पत्र, डिप्लोमा, उच्च डिप्लोमा और स्नातकोत्तर डिप्लोमा शामिल हैं। इन सभी को मिलाकर कुल 150 सीटें हैं। छात्रों का चयन उनकी हिंदी समझने और बोलने की क्षमता के आधार पर किया जाता है। स्वदेशी पाठ्यक्रमों की प्रवेश प्रक्रिया का द्वितीय चरण 22 जुलाई तक जारी रहेगा, जबकि विदेशी पाठ्यक्रमों की प्रवेश प्रक्रिया समाप्त हो चुकी है।
