मैंने आठ युद्ध सुलझाए, मैं डींग नहीं हांक रहा: डोनाल्ड ट्रंप की नोबेल शांति पुरस्कार की मांग | international news
अमेरिकी राजनीति में एक बार फिर नोबेल शांति पुरस्कार को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में बड़ा दावा करते हुए कहा है कि उन्होंने अपने राजनयिक प्रयासों के जरिए आठ अलग-अलग संघर्षों को शांतिपूर्ण ढंग से समाप्त किया है। ट्रंप का कहना है कि वे कोई शेखी नहीं बघार रहे हैं, बल्कि हकीकत बयां कर रहे हैं जो इतिहास में अभूतपूर्व है।
अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के जानकारों और विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह के बड़े दावे अक्सर घरेलू राजनीति और वैश्विक छवि को मजबूत करने के लिए किए जाते हैं। ट्रंप लंबे समय से खुद को एक ‘शांतिप्रिय नेता’ के रूप में स्थापित करने की कोशिश करते रहे हैं, जिन्हें वैश्विक स्तर पर उनके कूटनीतिक फैसलों का श्रेय मिलना चाहिए। हालांकि, विभिन्न रिपोर्ट्स और फैक्ट-चेकर्स इन दावों की सत्यता पर समय-समय पर सवाल उठाते रहे हैं क्योंकि कई मामलों में अमेरिका की भूमिका मध्यस्थ की नहीं बल्कि प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष पक्षकार की रही है।
इस बीच, रूस के साइबेरिया में स्थित एक रिसर्च इंस्टीट्यूट में हुई एक लैब वर्कर की संदिग्ध मौत और प्लेग के संभावित खतरों पर भी ट्रंप से सवाल किए गए। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति ने स्पष्ट किया कि फिलहाल इसे जैविक हथियार (बायोवेपन) माने जाने का कोई पुख्ता प्रमाण नहीं मिला है, लेकिन स्थिति पर करीब से नजर रखी जा रही है। वैश्विक सुरक्षा और स्वास्थ्य से जुड़े ऐसे मुद्दे पूरी दुनिया को प्रभावित करते हैं, जिससे अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंताएं बढ़ना स्वाभाविक है।
