आगरा में मानवाधिकारों की जंग: बाल श्रम और पुलिस ज्यादती पर NGO की चिंता, क्या है Agra news?
आगरा, जो प्रेम के प्रतीक ताजमहल के लिए विश्वभर में जाना जाता है, वहीं सामाजिक और आर्थिक विषमताओं की गहरी जड़ों से भी जूझ रहा है। मानवाधिकारों की रक्षा के लिए काम कर रहे संगठनों का कहना है कि शहर में बाल श्रम, घरेलू हिंसा और पुलिस ज्यादती जैसे मामले लगातार सामने आ रहे हैं। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो और श्रम विभाग के आंकड़ों के अनुसार, पिछले एक साल में जिले में 120 से अधिक बच्चों को बाल श्रम से मुक्त कराया गया। इनमें से कई बच्चे अंतरराज्यीय तस्करी के शिकार थे।
मानवाधिकारों के लिए काम कर रही संस्था महफूज के नरेश पारस ने बताया कि समाज के निचले पायदान पर खड़े लोगों के अधिकारों की सुरक्षा आज भी एक बड़ी चुनौती है। थानों में पीड़ितों की FIR आसानी से दर्ज नहीं होती और भ्रष्टाचार के कारण न्याय प्रक्रिया जटिल हो जाती है। समाजसेवी नितिन जौहरी ने कहा कि जागरूकता की कमी और सरकारी विभागों में जवाबदेही जवाबदेही का अभाव मानवाधिकारों के उल्लंघन को बढ़ावा देता है।
घरेलू हिंसा और महिलाओं के खिलाफ अपराध के मामले में भी आगरा संवेदनशील बना हुआ है। पिछले एक वर्ष में घरेलू हिंसा, दहेज उत्पीड़न और यौन उत्पीड़न के लगभग 450 से 500 मामले दर्ज किए गए हैं। हालांकि, सामाजिक दबाव के चलते कई मामले रिपोर्ट नहीं हो पाते। पुलिस ज्यादती की शिकायतें भी मानवाधिकार आयोग तक पहुंची हैं। पिछले दो वर्षों में राज्य मानवाधिकार आयोग को आगरा जिले से पुलिस कस्टडी में दुर्व्यवहार की 20 से अधिक शिकायतें मिली हैं, जिनमें कुछ मामलों में विभागीय जांच भी शुरू की गई है।
सामाजिक कार्यकर्ताओं ने मांग की है कि थानों में एफआईआर दर्ज करने की प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाया जाए। साथ ही, हर मोहल्ले और कॉलोनी में छोटे नागरिक समूह बनाए जाएं जो बाल श्रम या घरेलू हिंसा की घटनाओं को तुरंत रिपोर्ट कर सकें। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में फ्री लीगल एड कैंप लगाए जा रहे हैं, लेकिन सरकारी विभागों के भीतर जवाबदेही की कमी और प्रक्रियात्मक खामियां आज भी बड़ी चुनौती हैं।
