सुप्रीम कोर्ट में आवारा कुत्तों पर सुनवाई: जस्टिस ने कहा ‘कुत्ते डर पहचान लेते हैं’, जानें 6 बड़ी बातें
सुप्रीम कोर्ट में आवारा कुत्तों से जुड़े मामलों पर गुरुवार को लगातार दूसरे दिन सुनवाई हुई। कोर्ट ने कुत्तों के व्यवहार और उनके द्वारा इंसानों पर हमले की प्रवृत्ति पर विस्तार से चर्चा की। जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा ने अपने व्यक्तिगत अनुभव का हवाला देते हुए कहा कि कुत्ते अक्सर उन इंसानों को पहचान लेते हैं जो उनसे डरते हैं, और इसी डर के कारण वे हमला कर देते हैं। इस पर एक वकील ने असहमति जताई, लेकिन जस्टिस ने अपने अनुभव पर जोर दिया।
याचिकाकर्ता के वकील ने राज्यों द्वारा प्रस्तुत आंकड़ों पर सवाल उठाते हुए कहा कि नगर पालिकाओं द्वारा कितने शेल्टर चलाए जा रहे हैं, इसका कोई स्पष्ट उल्लेख नहीं है। उन्होंने बताया कि देश में केवल 5 सरकारी शेल्टर हैं, जिनमें से प्रत्येक केवल 100 कुत्तों को ही समायोजित कर सकता है। यह इंफ्रास्ट्रक्चर की भारी कमी को दर्शाता है, जो कोर्ट के निर्देशों के अनुसार शेल्टर होम बनाने के लिए अपर्याप्त है।
इससे पहले, एनिमल वेलफेयर की ओर से पेश एडवोकेट सी.यू. सिंह ने कुत्तों को हटाने या शेल्टर होम भेजने के प्रस्ताव पर आपत्ति जताई थी। उन्होंने तर्क दिया था कि कुत्तों को हटाने से चूहों की आबादी बढ़ सकती है, जिस पर कोर्ट ने मजाकिया अंदाज में बिल्लियों को लाने का सुझाव दिया था।
इस मामले पर पिछले 7 महीनों में छह बार सुनवाई हो चुकी है। पिछले साल नवंबर में सुप्रीम कोर्ट ने स्कूलों, अस्पतालों, बस स्टैंड, स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स और रेलवे स्टेशनों जैसे सार्वजनिक स्थानों से आवारा कुत्तों को हटाने और उन्हें निर्धारित शेल्टर में स्थानांतरित करने का आदेश दिया था।
सुनवाई के दौरान, एडवोकेट नकुल दीवान ने ‘ट्रैप, न्यूटर और रिलीज’ (TNR) मॉडल का सुझाव दिया और कहा कि कुत्तों को उसी स्थान पर वापस छोड़ना महत्वपूर्ण है जहां से उन्हें पकड़ा गया था। उन्होंने बेंगलुरु में शुरू की गई माइक्रो-चिपिंग प्रक्रिया का भी उल्लेख किया, जो कुत्तों की पहचान और उनके वैक्सीनेशन व नसबंदी के रिकॉर्ड को ट्रैक करने में मदद करती है।
याचिकाकर्ताओं के वकीलों ने इस बात पर जोर दिया कि अदालत का आदेश केवल संस्थानों तक सीमित न रहकर रिहायशी इलाकों पर भी लागू होना चाहिए। उन्होंने कहा कि एनिमल बर्थ कंट्रोल (ABC) नियमों का उद्देश्य कुत्तों की संख्या को धीरे-धीरे कम करना है, न कि उन्हें बढ़ाना। यह भी स्पष्ट किया गया कि पालतू जानवरों और सड़कों पर रहने वाले लेकिन इंसानों के आदी जानवरों के बीच अंतर को समझना आवश्यक है।
कानपुर में पीएम आवास योजना के तहत 4500 लाभार्थियों को मिलेगी आर्थिक सहायता, जानें कब आएंगे पैसे
कानपुर में आरटीई के तहत नर्सरी से कक्षा 1 तक मिलेगा प्रवेश, नई उम्र सीमा तय
घने कोहरे का असर: वाराणसी में 5 फ्लाइटें लखनऊ डायवर्ट, मिर्जापुर के ऊपर चक्कर काटता रहा विमान
बंदरों की करतूत से लखनऊ में बिजली गुल, 40 हजार लोग घंटों रहे परेशान
सड़क सुरक्षा अभियान: 97 वाहनों के चालान, 2.25 लाख का जुर्माना, जानें क्या है Zero Fatality लक्ष्य
ताज ट्रेपेजियम जोन में सड़क चौड़ीकरण के लिए 5119 पेड़ काटने की मिली सशर्त अनुमति, TTZ road widening
कासगंज में 12 जनवरी से रोजगार मेला: युवाओं को मिलेगी नौकरी का मौका
चीनी हथियारों की लगातार विफलताएं, बीजिंग की साख पर सवाल | China Arms Failure
