हरिद्वार स्वच्छता अभियान: चमक फीकी, ज़मीन पर गंदगी का अंबार
धर्मनगरी हरिद्वार में पिछले 18 दिनों से प्रशासन ‘स्वच्छ-सुंदर शहर अभियान’ चला रहा है। अभियान का कलेवर और शुरुआत तो सही है, परंतु जिस ईमानदारी के साथ इसे धरातल पर उतरना चाहिए था, वह अभी तक नहीं हो पाया है। यह मुहिम अभी भी उन चुनिंदा हाथों की सीमित कोशिशों तक सिमटी है, जिन्होंने इसकी शुरुआत की। शहर की तंग गलियों और गंगा तटों पर अभी स्वच्छता अभियान नहीं पहुंचा है।
हरिद्वार के सबसे संवेदनशील और महत्वपूर्ण क्षेत्र हरकी पैड़ी के आसपास का हाल भी सिस्टम के ‘अधूरे सच’ को बयां करता है। कांगड़ा घाट, नाई घाट, मलवीय द्वीप से जोड़ने वाले लकड़ी के पुल के दोनों ओर कूड़े और गंदगी के ढेर बदस्तूर कायम हैं। कांगड़ा घाट के अपर ब्रिज की एप्रोच दीवार पर देशी शराब के खाली पैकेटों का ढेर बताता है कि निगरानी और नियमों का पालन कराने में भारी ढील बरती गई है। जबकि हरकी पैड़ी का यह इलाका ड्राई क्षेत्र में आता है।
चंद कदमों की दूरी पर पुलिस चौकी भी है, परंतु लापरवाही यहीं तक सीमित नहीं है। हरकी पैड़ी के समीप जल पुलिस के वाच टावर में भी गंदगी का अम्बार लगा है। क्राउड कंट्रोल रूम (सीसीआर) से महज सौ मीटर की दूरी पर पर्यटन विभाग की दीनदयाल पार्किंग के निकासी मार्ग और आस्था पथ के बीच कूड़े का ढेर है। यह तस्वीर बयां करती है कि अभियान की गति मुख्य मार्गों से आगे बढ़ ही नहीं पाई।
