गव्य विकास योजना की आड़ में ठगी: साहिबगंज में डीप बोरिंग के नाम पर 100 लोगों से धोखाधड़ी
साहिबगंज जिले में गव्य विकास योजना के तहत डीप बोरिंग के नाम पर ग्रामीणों को ठगने का मामला प्रकाश में आया है। सूत्रों के अनुसार, महादेवगंज और जयंतीग्राम के करीब 100 लोगों से 40-40 हजार रुपये की ठगी की गई है। पीड़ितों ने बताया कि बिचौलियों ने खुद को विभाग का करीबी बताते हुए इस ठगी को अंजाम दिया।
सूत्रों के अनुसार, भोले-भाले ग्रामीणों को डीप बोरिंग के नाम पर ठगा गया। कुछ लोगों के यहां पाइप गाड़ दिए गए, लेकिन समरसेबल पंप नहीं लगाए गए। हैरानी की बात यह है कि जिन लोगों के यहां पाइप लगाए गए, उनका नाम गव्य विकास विभाग की सूची में भी नहीं है। इससे आशंका जताई जा रही है कि लाभुकों को शांत करने के लिए यह सब किया गया।
गव्य विकास विभाग ने 2022 में 10 या उससे अधिक गाय रखने वालों के लिए इस योजना की शुरुआत की थी। योजना के तहत, एक लाख रुपये में डीप बोरिंग होनी थी, जिसमें समरसेबल पंप भी लगाया जाना था। सामान्य श्रेणी के लाभुकों को 75 प्रतिशत अनुदान मिलना था, जबकि एसटी/एससी को 90 प्रतिशत अनुदान का प्रावधान था। लेकिन बिचौलियों ने सामान्य श्रेणी के लाभुकों से 40 हजार रुपये और एसटी/एससी से भी इतनी ही रकम वसूल की।
इस मामले में विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों की मिलीभगत से इनकार नहीं किया जा सकता है। हो-हंगामे के बाद कुछ लोगों के यहां पाइप गाड़ा गया है, लेकिन समरसेबल अब तक नहीं लगाया गया है। बोरिंग की गहराई कितनी है, यह भी स्पष्ट नहीं हो पाया है।
सूत्रों के अनुसार, बिचौलियों ने विभाग में अच्छी पैठ होने का दावा करते हुए लोगों को अपने विश्वास में लिया और उनसे पैसे वसूले। यह वसूली करीब छह-सात महीने पहले की गई थी। जब लोगों ने बोरिंग कराने को कहा, तो एक-दो पाइप गाड़ कर छोड़ दिया गया।
इस घटना से ग्रामीणों में रोष है और वे न्याय की मांग कर रहे हैं। अधिकारियों ने मामले की जांच का आश्वासन दिया है।
वित्तीय वर्ष 2024-2025 में, विभाग को पूरे जिले में 42 लाभुकों को डीप बोरिंग कराने का लक्ष्य मिला था। लेकिन इनमें से 37 डीप बोरिंग अकेले सदर प्रखंड की दो पंचायतों में कर दी गई। बोरियो में तीन तथा उधवा में दो लोगों को योजना का लाभ मिला। अन्य प्रखंडों में एक भी बोरिंग नहीं करायी गयी। वैसे योजना के तहत जिन लोगों के यहां बोरिंग की गई, उनके यहां समरसेबल भी लगा दिया गया। बताया जाता है कि बिचौलिए ने उन्हीं योजनाओं को दिखाकर अन्य लोगों से वसूली कर ली।
