आगरा: राइफल साफ करते सॉफ्टवेयर इंजीनियर की गोली लगने से मौत, परिवार सदमे में
आगरा में उस समय हड़कंप मच गया जब वर्क फ्रॉम होम कर रहे एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर की राइफल से अचानक चली गोली लगने से मौत हो गई। सॉफ्टवेयर इंजीनियर ज्ञानेंद्र शर्मा (42) को यह गोली ठोड़ी के नीचे लगी और सिर से पार निकल गई, जिससे उनके सिर के परखच्चे उड़ गए और चेहरा बुरी तरह क्षत-विक्षत हो गया। घटना के समय ज्ञानेंद्र के पिता, जो सेवानिवृत्त सूबेदार और ब्राह्मण महासभा के संस्थापक हैं, अपनी पत्नी के साथ एक पारिवारिक समारोह में गए हुए थे।
घटना पन्ना पैलेस के बराबर में स्थित आवास पर हुई। ज्ञानेंद्र शर्मा, जो गुरुग्राम की आईबीएम कंपनी में तैनात थे, पिछले कई महीनों से घर से काम कर रहे थे। घटना के समय उनकी पत्नी मनीषा शर्मा घर में सफाई कर रही थीं, जबकि उनके माता-पिता एक गमी में शामिल होने के लिए बाहर गए हुए थे। ज्ञानेंद्र आंगन में अपने पिता की सेमी ऑटोमेटिक .30 बोर की राइफल साफ कर रहे थे, जो उन्हें विरासत में मिली थी। इसी दौरान अचानक गोली चल गई।
गोली की आवाज सुनकर पत्नी मनीषा दौड़कर आंगन में पहुंचीं तो उन्होंने खौफनाक मंजर देखा। फर्श पर खून बिखरा हुआ था और पति का सिर बुरी तरह से क्षत-विक्षत हो चुका था, चेहरा पहचानना भी मुश्किल हो रहा था। पत्नी के शोर मचाने पर पड़ोसी जमा हो गए और सूचना मिलते ही ज्ञानेंद्र के पिता और मां भी घर लौट आए, जिसके बाद घर में चीत्कार मच गई।
पुलिस ने तुरंत मौके पर पहुंचकर फोरेंसिक टीम की मदद से साक्ष्य जुटाए और राइफल को कब्जे में ले लिया। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। पूछताछ में परिजनों ने बताया कि ज्ञानेंद्र राइफल साफ कर रहे थे और अचानक गोली चल गई। हालांकि, पुलिस इस बात से पूरी तरह सहमत नहीं है। सूत्रों के अनुसार, पुलिस का मानना है कि इस तरह से ठोड़ी के नीचे गोली लगना आत्महत्या की ओर इशारा कर सकता है, हालांकि परिवार इसे हादसा ही बता रहा है।
पुलिस को प्रारंभिक जांच में पता चला कि राइफल पहले ज्ञानेंद्र के पिता सत्यदेव शर्मा के नाम पर थी। 70 वर्ष की आयु पूरी होने पर उन्होंने अपने इकलौते बेटे ज्ञानेंद्र के नाम लाइसेंस बनवाकर राइफल उन्हें सौंप दी थी। राइफल अक्सर अलमारी में ही रखी रहती थी और बहुत दिनों बाद ज्ञानेंद्र ने इसे साफ करने के लिए निकाला था।
कार्यवाहक प्रभारी इंस्पेक्टर शेर सिंह ने बताया कि गोली चलने के बाद बचने का कोई मौका नहीं मिला। गोली ठोड़ी के नीचे से अंदर गई और सिर से पार निकल गई। गोली पार निकलने के बाद छत से भी टकराई थी। इस घटना ने ज्ञानेंद्र के परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है। उनके दो बेटे, ओम और माधव, जो सुबह स्कूल गए थे, उन्हें इस बात का अंदाजा भी नहीं था कि वे अपने पिता को वापस जीवित नहीं पाएंगे। ज्ञानेंद्र अपने पिता के इकलौते बेटे थे, और उनकी बहनों को यह खबर सुनकर गहरा आघात लगा है। बड़ी संख्या में रिश्तेदार और समाज के लोग सत्यदेव शर्मा के आवास पर पहुंचकर शोक संतप्त परिवार को ढांढस बंधाने का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन घरवालों के आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे।
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