चुनाव आयोग का अखिलेश यादव पर पलटवार, ‘भेड़िया आया’ की सुनाई कहानी
उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची से करीब तीन करोड़ नामों के हटने के बाद से विपक्षी दल, खासकर समाजवादी पार्टी, निर्वाचन आयोग और राज्य सरकार पर लगातार हमलावर हैं। सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने तो यहाँ तक आरोप लगा दिया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आदेश पर नाम काटे और जोड़े गए हैं। इस पर निर्वाचन आयोग ने पलटवार करते हुए अखिलेश यादव के बेईमानी के आरोपों को खारिज कर दिया है। अखिलेश यादव ने मुख्यमंत्री योगी के एक बयान का हवाला देते हुए पूछा था कि पहले बेईमानी हो रही थी या अब। आयोग ने स्पष्ट किया कि न तो पहले बेईमानी हो रही थी और न ही अब हो रही है, साथ ही उन्होंने ‘भेड़िया आया’ कहानी की याद दिलाई।
निर्वाचन आयोग द्वारा जारी ड्राफ्ट मतदाता सूची में लगभग तीन करोड़ नाम कटे हैं। इसी संदर्भ में समाजवादी पार्टी ने सवाल उठाया था कि मुख्यमंत्री आदित्यनाथ के पहले के बयान के अनुसार 4 करोड़ नाम कट रहे थे, जिसके बाद चुनाव आयोग सक्रिय हुआ और आनन-फानन में लगभग 1 करोड़ नाम जोड़े गए। सपा ने पूछा कि क्या आयोग यह बताएगा कि ये 1 करोड़ नाम मुख्यमंत्री के बयान के बाद कहाँ से जुड़े, या यह पहले या बाद में हुई बेईमानी है। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि न्यायालय में जवाब देना भारी पड़ेगा।
इसके जवाब में मुख्य चुनाव अधिकारी (सीईओ) ने एक्स पर लिखा कि भारत निर्वाचन आयोग पहले, आज और भविष्य में भी सक्रिय है। उन्होंने बताया कि नवंबर के दूसरे सप्ताह में राजनीतिक दलों के साथ हुई बैठक में सपा सहित अन्य दलों ने दो सप्ताह की अवधि बढ़ाने का अनुरोध किया था। 12 नवंबर को सीईओ ने मीडिया को बताया था कि उत्तर प्रदेश में गणना चरण के लिए 15 दिन का अतिरिक्त समय इसलिए लिया जा रहा है क्योंकि ड्राफ्ट मतदाता सूची से 2.97 करोड़ से अधिक नाम निकल रहे थे।
सीईओ ने यह भी स्पष्ट किया कि 15 दिन के अतिरिक्त समय में राजनीतिक दलों के बूथ लेवल एजेंट्स को उन मतदाताओं की सूचियां दी गई थीं जिनके नाम कट रहे थे। इस अवधि में 8-9 लाख लोगों को ड्राफ्ट सूची में शामिल किया गया। नतीजतन, 27 अक्टूबर 2025 की मतदाता सूची की तुलना में 6 जनवरी 2026 की ड्राफ्ट सूची में कुल 2.8876 करोड़ नाम ही कम हुए। आयोग ने दोहराया कि न तो पहले बेईमानी हो रही थी और न ही अब।
निर्वाचन आयोग ने सपा को इशारों-इशारों में नसीहत देते हुए Aesop Fables की प्रसिद्ध कहानी ‘द बॉय हू क्राइड वुल्फ’ (भेड़िया आया) का जिक्र किया। आयोग का इशारा स्पष्ट था कि बार-बार झूठ बोलने पर एक समय ऐसा आता है जब सच बोलने पर भी लोग विश्वास नहीं करते। यह कहानी बार-बार झूठे आरोप लगाने के गंभीर परिणामों की ओर संकेत करती है।
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