वायु प्रदूषण का इंसुलिन पर असर, बच्चों और बुजुर्गों में डायबिटीज का खतरा बढ़ा: experts
पटना में वायु प्रदूषण का सीधा असर इंसुलिन की कार्यक्षमता पर पड़ रहा है, जिसके परिणामस्वरूप बच्चों और बुजुर्गों में डायबिटीज (मधुमेह) का खतरा तेजी से बढ़ रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि प्रदूषित हवा में मौजूद सूक्ष्म कण (PM 2.5 और PM 10) श्वसन तंत्र के माध्यम से शरीर में प्रवेश कर आंतरिक सूजन पैदा करते हैं। यह सूजन इंसुलिन के प्रभाव को कम कर देती है, जिससे रक्त शर्करा (ब्लड शुगर) का स्तर बढ़ जाता है।
प्रदूषण के कारण इंसुलिन कोशिकाओं तक प्रभावी ढंग से नहीं पहुंच पाती, जिससे शुगर रक्त में ही बनी रहती है और अनियंत्रित हो जाती है। इसके अतिरिक्त, वायु प्रदूषण तनाव हार्मोन कोर्टिसोल के स्राव को बढ़ाता है, जो शुगर नियंत्रण को और मुश्किल बना देता है। खराब हवा के कारण लोग व्यायाम और टहलना कम कर देते हैं, जिससे वजन बढ़ने के साथ-साथ शुगर का प्रबंधन भी कठिन हो जाता है। पहले से मौजूद डायबिटीज के मरीजों में हृदय और किडनी संबंधी जटिलताओं का खतरा भी तेजी से बढ़ता है। लंबे समय तक प्रदूषित हवा के संपर्क में रहने से विशेष रूप से बच्चों और बुजुर्गों में मधुमेह विकसित होने की आशंका बढ़ जाती है।
इस बीच, नई दवाएं जैसे एसजीएलटी-2 इनहिबिटर शरीर से अतिरिक्त शुगर को पेशाब के माध्यम से बाहर निकालने में मदद करती हैं, जिससे न केवल ब्लड शुगर नियंत्रित होती है, बल्कि हृदय विफलता और किडनी खराब होने का खतरा भी कम होता है। टाइप-1 डायबिटीज के मरीजों के लिए दवा के साथ-साथ एरोबिक व्यायाम, हल्का वजन उठाना और स्ट्रेचिंग जैसे व्यायाम भी इंसुलिन के बेहतर कार्य और शारीरिक फिटनेस के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।
