डॉ रमीज का धर्मांतरण गैंग: पिता ने फंसाया, हिंदू लड़कियों को बनाते थे निशाना | conversion gang
केजीएमयू के रेजिडेंट डॉक्टर रमीज, उसके पिता सलीमुद्दीन और फीलखाना मोहल्ला, पीलीभीत के काजी जाहिद हसन राना मिलकर एक बड़े धर्मांतरण नेटवर्क का संचालन कर रहे थे। पुलिस की तफ्तीश में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि सलीमुद्दीन ने अपनी पहली पत्नी के रहते हुए ही 35 साल पूर्व एक पंजाबी महिला, खतीजा को प्रेम जाल में फंसाकर दूसरा निकाह किया था। डॉ. रमीज, सलीमुद्दीन की पहली पत्नी का ही बेटा है।
पुलिस के अनुसार, रमीज को उसके पिता और काजी जाहिद हसन दोनों मिलकर हिंदुओं के प्रति भड़काते थे। तीनों में हिंदुओं के प्रति काफी नफरत थी, जिसके चलते वे विशेष रूप से हिंदू लड़कियों को ही निशाना बनाते थे। वे मुस्लिम लड़कों को भी यही शिक्षा देते थे कि वे हिंदू लड़कियों को प्रेमजाल में फंसाएं, इलाज और पैसों की मदद का झांसा देकर उनका माइंडवाश करें। सलीमुद्दीन का उत्तराखंड के खटीमा में होम्योपैथिक क्लीनिक भी है, जहां वह हिंदू महिलाओं से करीबी बनाने की कोशिश करता था।
डॉ. रमीज के संपर्क में कई महिलाएं थीं, जिन्हें वह अक्सर हुसैनबाद स्थित फ्लैट पर ले जाता था। वह उत्तेजना बढ़ाने के लिए अमेरिकन गांजे का सेवन करता था, जिसे वह ऑनलाइन मंगवाता था। चौक पुलिस को डॉ. रमीज के पिता के मोबाइल से कई अहम सुराग मिले हैं, जिनसे कई इस्लामिक संगठनों और उनसे जुड़े लोगों के बारे में जानकारी प्राप्त हुई है।
यह गिरोह दीनी तालीम के नाम पर सभाएं करता था और बंद कमरों में लोगों को कट्टरता का पाठ पढ़ाता था। वे अपना अलग गिरोह खड़ा करने के लिए सहारनपुर के देवबंद भी जाया करते थे। इसके अलावा, तीनों कई कट्टरपंथी इस्लामिक संगठनों से जुड़े थे और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई जनपदों में दीनी तालीम देने जाते थे।
फिलहाल, पुलिस डॉ. रमीज, उसके पिता और गाजी समेत अन्य आरोपियों के बैंक खातों की पड़ताल कर रही है। बैंकों से लेन-देन का ब्योरा मांगा गया है ताकि यह पता लगाया जा सके कि कहीं विदेशों से कोई फंडिंग तो नहीं हो रही थी। पुलिस अन्य आर्थिक स्रोतों और संपत्ति का ब्योरा भी जुटा रही है। इस गिरोह का पर्दाफाश समाज में फैल रही कट्टरता और धर्मांतरण की गतिविधियों पर अंकुश लगाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
