धनबाद पार्सल कार्यालय में 500 खरगोशों का रेस्क्यू, पशु क्रूरता पर हंगामा
पूर्व मध्य रेलवे के धनबाद रेलवे पार्सल कार्यालय में रविवार को उस समय अफरातफरी मच गई, जब जालियों में बंद करीब 500 खरगोशों को अमानवीय स्थिति में पाया गया। कई खरगोशों की मौत हो चुकी थी और बाकी की हालत गंभीर थी। इस घटना के बाद स्थानीय पशु अधिकार कार्यकर्ताओं ने रेलवे पर घोर लापरवाही और पशु क्रूरता का गंभीर आरोप लगाया है।
सूत्रों के अनुसार, पश्चिम बंगाल के दुर्गापुर स्थित एक फर्म का कर्मचारी इन खरगोशों को लेकर धनबाद पहुंचा था। पारगमन के दौरान कर्मचारी की तबीयत अचानक बिगड़ गई, जिसके चलते वह सभी जालियों को पार्सल कार्यालय में ही छोड़कर चला गया। लंबे समय तक भोजन और पानी के अभाव में, कई खरगोशों ने दम तोड़ दिया, जबकि शेष की स्थिति अत्यंत नाजुक हो गई थी।
घटनास्थल पर पहुंचे एनिमल एक्टिविस्ट शौमिक बनर्जी ने इस अमानवीय कृत्य का कड़ा विरोध किया। उन्होंने बताया कि प्रति जाली में खरगोशों की एक निश्चित संख्या रखने का नियम है, लेकिन यहाँ हर जाली में क्षमता से कहीं अधिक खरगोश ठूंस दिए गए थे। बनर्जी ने रेलवे प्रशासन से इस मामले में तत्काल और कठोर कार्रवाई करने की मांग की है। सूचना मिलते ही रेल पुलिस और वन विभाग की टीमें भी मौके पर पहुंचीं।
जानकारी मिली है कि इन खरगोशों को धनबाद से मुरादाबाद भेजा जाना था। हालांकि, पार्सल सुपरवाइजर ने परिवहन नियमों के स्पष्ट उल्लंघन का हवाला देते हुए शिपमेंट को रोक दिया। सुपरवाइजर के मुताबिक, एक जाली में अधिकतम दो खरगोश ही भेजे जा सकते हैं, जो यहाँ की स्थिति से बिल्कुल विपरीत था।
घटना के बाद, वन विभाग की टीम ने जालियों का निरीक्षण किया और उनकी माप ली। वन प्रमंडल पदाधिकारी ने स्पष्ट किया कि यह मामला वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के दायरे में नहीं आता है, इसलिए विभाग केवल एक औपचारिक जांच कर रहा है।
वहीं, रेल थाना प्रभारी ने बताया कि इस संबंध में अभी तक कोई औपचारिक शिकायत दर्ज नहीं हुई है। उन्होंने आश्वासन दिया कि मामले की गहन जांच की जा रही है और जो भी जिम्मेदार पाया जाएगा, उसके खिलाफ नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इस घटना ने पशुओं के परिवहन में बरती जाने वाली लापरवाही और क्रूरता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
