निर्धारित गति के बावजूद हाईवे पर मौत का तांडव, वाराणसी में हरहुआ रिंग रोड बना ‘डेथ जोन’
वाराणसी जिले में हाईवे और रिंग रोड पर दुर्घटनाओं की संख्या चिंताजनक रूप से बढ़ रही है। तेज गति और यातायात नियमों की अनदेखी इन हादसों का मुख्य कारण है। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के अनुसार, तेज रफ्तार, रात में कम रोशनी और मोबाइल फोन का उपयोग दुर्घटनाओं के प्रमुख कारण हैं।
हाईवे पर गाड़ी चलाना शहर की सड़कों से अलग होता है, जहां गति अधिक होती है और अप्रत्याशित स्थितियां (जैसे जानवर या अचानक कट से आने वाले वाहन) सामने आती हैं। वाराणसी के आसपास के नेशनल और स्टेट हाईवे पर यह समस्या गंभीर है। हरहुआ रिंग रोड पर सिग्नल सालों से खराब है और रात में ट्रैफिक पुलिस मौजूद नहीं रहती है।
काजीसराय के पास गड़वा चौराहा और वाराणसी-आजमगढ़ मार्ग पर गोला गांव के पास बने कट भी दुर्घटना बहुल क्षेत्र हैं। गोला ग्राम के समीप बने कट पर बीते छह महीने में छह से अधिक लोगों की मौत हो गई है। लिंक रोड से अचानक हाईवे पर गाड़ियों के आने से दुर्घटना होती है। तेज गति से आने वाले वाहनों को अचानक सामने आए वाहन या पैदल यात्री को देखकर ब्रेक लगाना मुश्किल हो जाता है।
जबकि एनएचएआई द्वारा घनी बस्तियों में सर्विस रोड बनाने का नियम है, जिसका पालन नहीं होता। नेशनल हाईवे पर हल्के वाहनों के लिए 80-100 किमी/घंटा और भारी वाहनों के लिए 55-65 किमी/घंटा की गति निर्धारित है, लेकिन इसका उल्लंघन होता है, जिससे दुर्घटनाएं होती हैं।
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