DBT: कैसे बदल रही है योजनाओं का पैसा लाभार्थियों तक पहुंचाने की व्यवस्था, घपलेबाजी पर लगाम
नई दिल्ली। भारत सरकार विभिन्न योजनाओं के माध्यम से वंचित वर्गों को सब्सिडी प्रदान करती है, लेकिन पहले भ्रष्टाचार के कारण यह राशि अक्सर उन तक नहीं पहुंच पाती थी। इस समस्या को दूर करने के लिए, सरकार ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है: डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) योजना।
DBT योजना के तहत, लाभार्थियों के आधार से जुड़े बैंक खातों में सीधे लाभ हस्तांतरित किए जाते हैं। इस प्रक्रिया से पारदर्शिता सुनिश्चित होती है और बिचौलियों की भूमिका समाप्त हो जाती है। हाल ही में, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोयंबटूर से PM Kisan योजना की 21वीं किस्त DBT के माध्यम से किसानों के खातों में भेजी। सूत्रों के अनुसार, इस दौरान 9 करोड़ से अधिक किसानों के खातों में 18 हजार करोड़ रुपये से अधिक की राशि DBT के जरिए भेजी गई।
DBT का मुख्य उद्देश्य है कि लाभ या सब्सिडी सीधे गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले नागरिकों तक पहुंचे, जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि सहायता जरूरतमंदों तक पहुंचे। सरकार लाभार्थियों के आधार से जुड़े बैंक खातों में नकद लाभ और सब्सिडी हस्तांतरित करती है। यह योजना 1 जनवरी 2013 को लागू की गई थी, जिसका उद्देश्य सब्सिडी राशि को सीधे लाभार्थियों के खातों में पहुंचाना था। प्रारंभ में, योजना आयोग ने DBT कार्यक्रम के क्रियान्वयन पर ध्यान केंद्रित किया, लेकिन बाद में विभिन्न विभागों ने इसका कार्यभार संभाला। 14 सितंबर 2015 को, DBT योजना से संबंधित मामलों को कैबिनेट सचिवालय को हस्तांतरित कर दिया गया।
DBT योजना वंचित लोगों की मदद के लिए सरकार की एक सुनियोजित पहल है। पारदर्शिता को बढ़ावा देने के लिए, सरकार केंद्रीय योजना निगरानी प्रणाली (CPSMS) के माध्यम से इस योजना के लिए पात्र लोगों की सूची तैयार करती है। इसके बाद, आधार कार्ड से आवश्यक विवरण प्राप्त किए जाते हैं, जिससे लाभार्थियों को धनराशि का हस्तांतरण आसानी से हो जाता है।
प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (PM Kisan) योजना, भूमि धारक किसानों की वित्तीय जरूरतों को पूरा करने के लिए एक महत्वपूर्ण पहल है। DBT के माध्यम से, किसान परिवारों के बैंक खातों में प्रति वर्ष 6,000 रुपये का वित्तीय लाभ हस्तांतरित किया जाता है। इस योजना ने बिचौलियों को पूरी तरह से दरकिनार कर दिया है, जिससे किसानों को सीधे लाभ मिल रहा है। सूत्रों के अनुसार, DBT के कारण किसानों को अब किसी भी तरह की कटौती या देरी का सामना नहीं करना पड़ता है, जिससे यह योजना अधिक प्रभावी हो गई है।
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