कानपुर एलिवेटेड रोड का श्रेय: कांग्रेस ने निकाली पदयात्रा, बताई अपनी भूमिका
कानपुर में रामादेवी से गोल चौराहे तक प्रस्तावित एलिवेटेड रोड के निर्माण का श्रेय लेने के लिए राजनीतिक दलों में घमासान मचा हुआ है। हाल ही में केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के ट्वीट के बाद भाजपा नेताओं ने इस परियोजना को अपनी मेहनत का परिणाम बताया। वहीं, कांग्रेस ने इस दावे का खंडन करते हुए कहा है कि इस एलिवेटेड रोड की स्वीकृति कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में ही मिली थी।
इसी संदर्भ में, कांग्रेस ग्रामीण जिला संगठन के अध्यक्ष संदीप शुक्ला के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने रामादेवी से पदयात्रा निकाली। इस पदयात्रा का मुख्य उद्देश्य यह बताना था कि इस कॉरिडोर की स्वीकृति में तत्कालीन कांग्रेस सरकार की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। पदयात्रा में कांग्रेस नेताओं ने पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, सोनिया गांधी, राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और कानपुर के पूर्व सांसद श्रीप्रकाश जायसवाल की तस्वीरें लेकर ‘काम हमारा, नाम तुम्हारा नहीं चलेगा’ के नारे लगाए।
कांग्रेसियों का दावा है कि उनकी सरकार के दौरान ही आईआईटी से टाटमिल तक सर्वे और डीपीआर (विस्तृत परियोजना रिपोर्ट) तैयार कर ली गई थी। बाद में इसे टाटमिल से आगे रामादेवी तक विस्तार का प्रस्ताव भेजा गया। हालांकि, 2014 में केंद्र में भाजपा सरकार बनने के बाद इस फाइल को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया था। अब 15 साल बाद उसी फाइल को नए सिरे से पेश किया जा रहा है। इस पदयात्रा में संदीप शुक्ला, धर्मराज सिंह चौहान, उमेश दीक्षित, शिवनाथ शुक्ला, अंकित कन्नौजिया, इखलाक अहमद डेविड, आनंद वर्मा, अमित शुक्ला मोनू, विजय निषाद, प्रदीप बाजपेई, शक्ति पांडेय, प्रतिभा अटल पाल और सतीश दीक्षित सहित कई कार्यकर्ता शामिल हुए। इस परियोजना का सार्वजनिक प्रभाव यह होगा कि यह शहर में यातायात की भीड़ को कम करने और आवागमन को सुगम बनाने में मदद करेगा।
