कफ सीरप घोटाला: बिना सत्यापन लाइसेंस देने वाले विभाग पर गिरी गाज, अब अधिकारी भी जांच के दायरे में
जौनपुर में कोडीनयुक्त सीरप की तस्करी के मामले में खाद्य सुरक्षा एवं औषधि विभाग भी जांच के घेरे में आ गया है। इस मामले में अपर पुलिस अधीक्षक आयुष श्रीवास्तव ने बताया कि कार्रवाई की जद में आए तीन आरोपितों को विभाग ने बिना सत्यापन के ही लाइसेंस निर्गत कर दिया था। अब विभाग की भूमिका की भी गहनता से जांच की जाएगी।
जांच में पता चला कि जिन तीन दवा कारोबारियों के विरुद्ध मुकदमा दर्ज किया गया है, उनकी फर्म पर दिल्ली से 17 व 18 सितंबर को एक ही ट्रक से 1.86 लाख बाटल कोडीनयुक्त सीरप आया था। एसआईटी टीम की जांच में यह तीनों दुकानें मौके पर नहीं मिलीं। इनकी जगह पर अलग-अलग दुकानें संचालित मिलीं। इससे लाइसेंस निर्गत करने वाले औषधि निरीक्षक की भूमिका जांच के घेरे में आ गई है।
अपर पुलिस अधीक्षक ने कहा कि लाइसेंस तो दे दिया गया, लेकिन उसका सत्यापन नहीं किया गया। जनपद में 4600 से अधिक दुकानें हैं, जांच के बाद पता चलेगा कि इनमें कितनी मौके पर हैं। तत्कालीन औषधि निरीक्षक का मौके पर जाकर सत्यापन करने की तस्वीर भी लगी है, लेकिन फर्म संचालकों ने लाइसेंस लेने के बाद उसके स्वरूप को बदल दिया है। औषधि निरीक्षक रजत पांडेय ने कहा कि लाइसेंस निर्गत संबंधी सभी तथ्यों का जिक्र मैंने तहरीर में किया है।
कफ सीरप प्रकरण में झारखंड पुलिस ने भी जांच शुरू कर दी है, और एसआईटी ने आरोपियों पर गैंगेस्टर एक्ट लगाने की तैयारी शुरू कर दी है।
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