आगरा रेलवे कंट्रोल रूम में बढ़ा विवाद, तीन कंट्रोलरों ने मांगा वीआरएस | agra news
आगरा के मंडलीय रेलवे कंट्रोल रूम में कार्यप्रणाली और प्रशासनिक उत्पीड़न को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। लगातार बढ़ रहे काम के बोझ और पिछले तीन महीने से अवकाश न मिलने के कारण मानसिक तनाव से जूझ रहे तीन कंट्रोलरों ने वीआरएस के लिए औपचारिक आवेदन कर दिया है। इस घटनाक्रम से रेलवे कर्मचारियों में भारी रोष व्याप्त है और यह सीधे तौर पर रेल संचालन व्यवस्था पर भी असर डाल रहा है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, वर्तमान में इस कंट्रोल रूम में 36 कंट्रोलरों की तैनाती है, जो तीन शिफ्टों में अपनी सेवाएं देते हैं। इन पर मंडल से गुजरने वाली रोजाना 250 से अधिक यात्री गाड़ियों और 200 मालगाड़ियों के सुरक्षित संचालन की जिम्मेदारी होती है। भारी दबाव के बीच छुट्टियां न मिलने से कर्मचारियों का स्वास्थ्य प्रभावित हो रहा है।
इस पूरे विवाद के केंद्र में सीनियर डीओएम कुलदीप मीना की कार्यशैली पर सवाल उठ रहे हैं। कर्मचारियों ने उन पर मानसिक उत्पीड़न और तानाशाही रवैया अपनाने के आरोप लगाए हैं। हाल ही में एक अन्य अधिकारी की आत्महत्या के मामले में भी परिजनों द्वारा इन्हीं अधिकारी पर गंभीर आरोप लगाए गए थे, जिसके बाद से रेलवे बोर्ड स्तर पर भी मामले की सुगबुगाहट तेज हो गई है।
इस गंभीर स्थिति को देखते हुए उत्तर मध्य रेलवे प्रयागराज जोन के उच्चाधिकारियों ने आगरा का दौरा किया है और पीड़ित परिवार तथा कर्मचारियों से बातचीत की है। यदि समय रहते प्रशासनिक स्तर पर सुधारात्मक कदम नहीं उठाए गए, तो यह विवाद रेलवे के अन्य मंडलों तक भी फैल सकता है, जिससे रेल सेवाओं की सुरक्षा और कार्यकुशलता पर विपरीत प्रभाव पड़ सकता है।
