14 साल में फ्लैट न देने पर बिल्डर पर 34.50 लाख का हर्जाना, Consumer Court का फैसला
सिकंदरा की एक आवासीय परियोजना में फ्लैट बुक कराने वाले डॉक्टर को 14 साल बाद भी न फ्लैट मिला और न ही जमा धनराशि वापस हुई। इस मामले में जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग द्वितीय ने बिल्डर कंपनी एनआईआईएल इंफ्रास्ट्रक्चर प्रा. लि. के निदेशकों को आदेश दिया है कि वे वादी को 33.50 लाख रुपये 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित लौटाएं। आयोग ने मानसिक पीड़ा और वाद व्यय के तौर पर एक लाख रुपये अतिरिक्त देने का भी निर्देश दिया है।
यह फैसला डॉ. वाईपी सिंह निवासी कुंवर कॉलोनी, खंदारी रोड द्वारा दायर वाद पर सुनाया गया। वादी ने मार्च 2012 में एनआईआईएल इंफ्रास्ट्रक्चर प्रा. लि. की ‘दि फ्लोरेंस प्लेटिनम बिल्डिंग’ परियोजना में एक थ्री बीएचके फ्लैट के लिए 33.50 लाख रुपये का भुगतान किया था। कंपनी ने फ्लैट संख्या के-805 आवंटित करने का दावा किया था, लेकिन आरोप है कि पूरी धनराशि लेने के बावजूद वर्षों तक न तो फ्लैट का कब्जा दिया गया और न ही रकम लौटाई गई।
बिल्डर के कार्यालय के लगातार चक्कर लगाने और केवल आश्वासन मिलने से परेशान होकर वादी ने उपभोक्ता आयोग की शरण ली। आयोग ने सुनवाई के बाद वादी के पक्ष में फैसला सुनाया, जिससे यह स्पष्ट होता है कि बिल्डरों को ग्राहकों के साथ धोखाधड़ी महंगी पड़ सकती है। यह निर्णय अन्य फ्लैट खरीदारों के लिए भी एक सबक है जो लंबे समय से अपने फ्लैट का इंतजार कर रहे हैं।
