कौवे की कहानी से बच्चों ने सीखा संतोष में खुशी का रहस्य: Lucknow kids learn secret of happiness
लखनऊ के दुबग्गा स्थित पीएचसी भूहर द्वितीय में लोक संस्कृति शोध संस्थान ने ‘दादी नानी की कहानी’ का आयोजन किया। इस कार्यक्रम में बच्चों को एक प्रेरक कहानी के माध्यम से जीवन का महत्वपूर्ण सबक सिखाया गया। स्टोरीमैन जीतेश श्रीवास्तव ने बताया कि सच्ची खुशी किसी से तुलना करने में नहीं, बल्कि अपने पास जो है उसमें संतोष करने में है।
जीतेश ने एक कौवे की कहानी सुनाई, जो अपने काले रंग से नाखुश होकर सबसे खुश पक्षी की तलाश में निकलता है। हंस, तोता और मोर से मिलते हुए वह चिड़ियाघर पहुंचता है, जहाँ मोर उसे बताता है कि उसकी सुंदरता ही उसकी कैद का कारण बन गई है। अंततः कौवे को यह अहसास होता है कि वही सबसे खुश है क्योंकि वह स्वतंत्र है। इस कहानी के माध्यम से बच्चों को यह समझाया गया कि जो हमारे पास है, उसमें संतुष्ट रहना ही सच्ची खुशी का मार्ग है।
कार्यक्रम की शुरुआत मनोरंजक खेलों से हुई, जिसमें बच्चों ने अभिनय और वाक्य उच्चारण का अभ्यास किया। इस अवसर पर चौपाल प्रभारी अर्चना गुप्ता, संस्थान की सचिव डॉ. सुधा द्विवेदी, प्रभारी प्रधानाध्यापक आशीष पंवार, सहायक अध्यापक ऊषा देवी वर्मा और सोशल लाइफ लाइन फाउंडेशन के अध्यक्ष डॉ. अनिल कुमार गुप्ता सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे। इस तरह की सांस्कृतिक गतिविधियाँ बच्चों के मानसिक विकास के लिए महत्वपूर्ण हैं।
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