दिल्ली में कड़ाके की ठंड के बीच यमुना नदी एक बार फिर सफेद 'जहरीली झाग' की चादर में लिपट गई है। कालिंदी कुंज के पास नदी का नजारा किसी ग्लेशियर जैसा दिख रहा है, लेकिन...
दिल्ली में कड़ाके की ठंड के बीच यमुना नदी एक बार फिर सफेद ‘जहरीली झाग’ की चादर में लिपट गई है। कालिंदी कुंज के पास नदी का नजारा किसी ग्लेशियर जैसा दिख रहा है, लेकिन हकीकत यह है कि यह टॉक्सिक फोम है जो तमाम कोशिशों के बावजूद वापस आ गया है।
दिल्ली जल बोर्ड ने इस बार झाग को हटाने के लिए रिकॉर्ड मात्रा में ‘डीफोमर’ केमिकल का इस्तेमाल किया था। अक्टूबर से दिसंबर 2025 के बीच 63 दिनों में करीब 48,000 किलोग्राम केमिकल का छिड़काव किया गया। इसके बावजूद, सर्दियों में तापमान गिरते ही झाग और गाढ़ा हो गया है।
झाग का कारण और ठंड का असर
एक्सपर्ट्स के अनुसार, ठंड में तापमान कम होने के कारण झाग के बुलबुले स्थिर हो जाते हैं, जिससे वे जल्दी नहीं फूटते। डीफोमिंग केवल लक्षणों का इलाज है। असली समस्या नदी में मौजूद प्रदूषण है। घरों और उद्योगों से निकलने वाला बिना ट्रीट किया गया सीवेज और डिटर्जेंट इस झाग का मुख्य कारण है। जब ओखला बैराज से पानी ऊंचाई से गिरता है, तो यह प्रदूषित पानी मथ जाता है, जिससे भारी मात्रा में झाग बनता है।
द एनर्जी एंड रिसोर्सेज इंस्टीट्यूट (TERI) की एक स्टडी में सामने आया है कि अक्षरधाम, खिचड़ीपुर और रेलवे कॉलोनी के धोबी घाट हॉटस्पॉट बने हुए हैं, जहां से बिना ट्रीट किया गया गंदा पानी सीधे यमुना में मिल रहा है।
केमिकल ट्रीटमेंट पर सवाल
यमुना एक्टिविस्ट पंकज कुमार ने उपराज्यपाल को पत्र लिखकर चेतावनी दी है कि लगातार डीफोमर केमिकल का छिड़काव नदी की पारिस्थितिकी (ecology) के लिए घातक हो सकता है। इससे पानी में ऑक्सीजन का स्तर गिर सकता है और जलीय जीवन को नुकसान पहुंच सकता है।
यमुना की इस हालत पर दिल्ली में राजनीति भी गरमा गई है। आम आदमी पार्टी नेता सौरभ भारद्वाज ने झाग के बीच मूर्तियों के विसर्जन का वीडियो शेयर करते हुए तंज कसा। जवाब में दिल्ली बीजेपी अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने दावा किया कि आप नेता द्वारा शेयर किया गया वीडियो ‘AI जनरेटेड’ है।