यूपी में न्यायिक सेवा (Judicial Service) पदोन्नति नियमों में बदलाव, जानें क्या है नया कोटा
उत्तर प्रदेश सरकार ने न्यायिक सेवा में पदोन्नति के नियमों में बड़ा बदलाव किया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में उत्तर प्रदेश उच्चतर न्यायिक सेवा नियमावली 1975 में संशोधन को मंजूरी दी गई है। इस बदलाव के तहत सिविल जज (सीनियर डिवीजन) के पदों पर पदोन्नति के लिए कोटा और चयन प्रक्रिया में परिवर्तन किया गया है।
पदोन्नति कोटे में मुख्य बदलाव
नई व्यवस्था के अनुसार, सिविल जज (सीनियर डिवीजन) से पदोन्नति के लिए श्रेष्ठता-सह-ज्येष्ठता और उपयुक्तता परीक्षा पास करने वाले अधिकारियों का कोटा 65 प्रतिशत से घटाकर 50 प्रतिशत कर दिया गया है। यह बदलाव न्यायिक अधिकारियों की पदोन्नति प्रक्रिया को प्रभावित करेगा।
दूसरी ओर, सीमित विभागीय प्रतियोगी परीक्षा के जरिए पदोन्नति का कोटा 10 प्रतिशत से बढ़ाकर 25 प्रतिशत कर दिया गया है। इस परीक्षा में वे सिविल जज शामिल हो सकेंगे जिन्होंने उस पद पर कम से कम तीन साल की सेवा और उत्तर प्रदेश न्यायिक सेवा में कुल सात साल की सेवा पूरी की हो। अधिवक्ताओं (बार) से सीधी भर्ती का कोटा पहले की तरह 25 प्रतिशत ही रहेगा। यह संशोधन हाईकोर्ट की संस्तुति पर आधारित है और उत्तर प्रदेश उच्चतर न्यायिक सेवा (अठारहवां संशोधन) नियमावली 2026 के रूप में लागू किया जाएगा।
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