Bundelkhand agriculture: बुंदेलखंड की कृषि चुनौतियों के समाधान के लिए शोध संस्थानों में सहयोग जरूरी
बुंदेलखंड क्षेत्र की कृषि चुनौतियों को देखते हुए, हैदराबाद स्थित इंटरनेशनल किरोप्स रिसर्च इंस्टीट्यूट फॉर द सेमी-ऐरीड टिरोपिक्स (आईसीआरआईएसएटी) ने रानी लक्ष्मीबाई केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय के साथ मिलकर काम करने पर जोर दिया है। आईसीआरआईएसएटी के उपमहानिदेशक डॉ. स्टैनफोर्ड ब्लेड ने विश्वविद्यालय का दौरा किया और कहा कि बुंदेलखंड सहित अर्धशुष्क क्षेत्रों के किसानों के लिए अनुसंधान एवं विकास के क्षेत्र में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय संस्थानों के बीच समन्वय समय की आवश्यकता है।
डॉ. ब्लेड ने चना, सरसों, जौ तथा ड्यूरम गेहूँ फसलों पर हो रहे शोध कार्यों की प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि इन फसलों में हो रहा सुधार बुंदेलखंड के किसानों के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध होगा। उन्होंने तकनीकी आदान-प्रदान, संयुक्त परियोजनाओं तथा वैज्ञानिक सहयोग को कृषि उन्नति की आधारशिला बताया।
विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. अशोक कुमार सिंह ने कहा कि जलवायु परिवर्तन, सीमित जल संसाधन तथा मृदा क्षरण जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए संस्थागत सहयोग अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने आईसीआरआईएसएटी और विश्वविद्यालय के बीच संयुक्त अनुसंधान, छात्र-शोधार्थी विनिमय तथा उन्नत तकनीकों के साझा उपयोग की संभावनाओं पर प्रकाश डाला।
