पीलीभीत टाइगर रिजर्व में कर्नाटक के संस्कार सीखेगी बिजनौर की हथिनी: एक नई शुरुआत
पीलीभीत टाइगर रिजर्व (पीटीआर) इन दिनों एक बेहद भावनात्मक और अनोखे संयोग का साक्षी बन रहा है। दक्षिण भारत से आई हथिनी निसर्गा और बिजनौर से लाई गई 21 दिन की बेसहारा मादा हथिनी के बीच एक रिश्ता पनप रहा है, जो मां-बेटी जैसा है। तराई के जंगल में पहली बार किसी नन्हीं हथिनी ने अपना बचपन शुरू किया है, जो पीटीआर के इतिहास में एक खास पल है। 3 दिसंबर को अपनी मां से बिछड़ने के बाद असहाय नन्हीं हथिनी को सरकार के निर्णय पर पीलीभीत टाइगर रिजर्व लाया गया।
महज 21 दिन की उम्र में जंगल का नया संसार उसके लिए चुनौतीपूर्ण था, लेकिन अब उसे तीन साल पहले पीटीआर लाई गई हथिनी निसर्गा का सानिध्य मिल रहा है। वन विभाग के अनुसार, नन्हीं हथिनी को धीरे-धीरे निसर्गा के करीब लाया जा रहा है, ताकि उनके बीच अपनापन विकसित हो सके। शुरुआती संकेत सकारात्मक हैं। वनकर्मियों के मुताबिक, निसर्गा ने पहली बार नन्हीं हथिनी को शांत भाव से निहारा, जो भावनात्मक स्वीकार्यता का संकेत है।
पीटीआर के डीएफओ मनीष सिंह ने बताया कि यदि कर्नाटक से आए हाथियों का परिवार, जिसमें निसर्गा, छोटा सूर्या, बड़ा सूर्या और मणिकांत शामिल हैं, इस नन्हीं हथिनी को अपना लेता है, तो यह पीटीआर के लिए ऐतिहासिक होगा। रिजर्व में हाथी के बच्चे के पालन-पोषण का यह पहला प्रत्यक्ष अनुभव होगा, जो न केवल हाथियों के कुनबे को बढ़ाएगा बल्कि वन्यजीव संरक्षण की दिशा में भी सकारात्मक संदेश देगा।
फिलहाल नन्हीं हथिनी को कोई शक्ति या रोहिणी नाम से पुकारा जा रहा है, हालांकि आधिकारिक नामकरण अभी बाकी है। महावत और वनकर्मी उसे निसर्गा के पास ले जाकर हाथियों के कुनबे से परिचित करा रहे हैं, ताकि वह सुरक्षित महसूस कर सके।
स्वास्थ्य की दृष्टि से भी नन्हीं हथिनी पर कड़ी नजर रखी जा रही है। वह प्रतिदिन करीब 17 लीटर दूध पी रही है और नौ घंटे सो रही है। उसका बॉडी टेम्परेचर सामान्य है। ठंड के मौसम को देखते हुए विशेष सतर्कता बरती जा रही है। वन अधिकारियों के अनुसार, तराई के आंगन में दक्षिण के संस्कारों की छांव में एक नया बचपन आकार ले रहा है। यदि यह रिश्ता पूरी तरह पनपता है, तो निसर्गा और नन्हीं हथिनी की यह कहानी पीलीभीत टाइगर रिजर्व ही नहीं, बल्कि देश भर के लिए एक मिसाल बन सकती है।
