कानपुर में 37 बीघा जमीन का बड़ा घोटाला, 1985 में ही बिक गई थी संपत्ति; बेटे को 2025 में मिला नोटिस (Kanpur land dispute)
कानपुर में एक हैरान कर देने वाला जमीन विवाद सामने आया है। एक दिवंगत वकील राजाराम वर्मा जिस 37 बीघा जमीन के लिए पांच दशकों तक कानूनी लड़ाई लड़ते रहे, वह संपत्ति 1985 में ही बेची जा चुकी थी। इस धोखाधड़ी का खुलासा तब हुआ जब वकील के बेटे नरेंद्र देव को नवंबर 2025 में दाखिल खारिज (mutation) का नोटिस मिला। नरेंद्र देव ने पुलिस आयुक्त से शिकायत की, जिसके बाद जांच शुरू हुई।
नरेंद्र देव ने पुलिस को बताया कि उन्हें राकेश तिवारी नाम के व्यक्ति ने 1985 की रजिस्ट्री का एक पेज दिखाया था। इसमें दावा किया गया था कि उनके पिता ने लखनऊ निवासी दिनेश सिंह संतोषी को जमीन बेच दी थी। दिनेश ने बाद में इसका एक हिस्सा अनिल गुप्ता को बेच दिया। नरेंद्र ने पहले इसे नजरअंदाज कर दिया, लेकिन जब उन्हें महाराजपुर नायब तहसीलदार से नोटिस मिला तो उन्हें डर लगा कि संपत्ति हाथ से निकल जाएगी। उन्होंने जांच की तो पता चला कि दिनेश सिंह संतोषी की मृत्यु हो चुकी है और तहसील के रिकॉर्ड में भी छेड़छाड़ की गई है।
पुलिस आयुक्त ने मामले की गंभीरता को देखते हुए दो इंस्पेक्टरों की टीम गठित की है। जांच में कई चौंकाने वाली बातें सामने आई हैं। सबसे पहले, यह पता चला कि जमीन का क्षेत्राधिकार (jurisdiction) बिठूर नायब तहसीलदार का है, जबकि नोटिस महाराजपुर से जारी किया गया था। तहसील के दस्तावेजों की जांच में थंब इंप्रेशन (अंगूठे के निशान) वाला पन्ना फटा हुआ मिला। साथ ही, रजिस्टर में रजिस्ट्री दर्ज करने के क्रम में भी बदलाव पाया गया है।
पुलिस आयुक्त ने बताया कि राकेश तिवारी को पूछताछ के लिए बुलाया गया था, लेकिन वह उपस्थित नहीं हुए। उनके बैंक खाते से मृतक वकील की पत्नी रेखा वर्मा को किए गए कुछ लेनदेन भी जांच के दायरे में हैं। पुलिस का कहना है कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
कानपुर: जिस जमीन के लिए 50 साल लड़े वकील, वह 1985 में ही बिक चुकी थी; बेटे को मिला नोटिस
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