PMLA पर दिल्ली HC का बड़ा फैसला: अब चार्जशीट के बिना भी जब्त हो सकेगी संपत्ति, ED को मिली बड़ी ताकत
दिल्ली उच्च न्यायालय ने PMLA (धन शोधन निवारण अधिनियम) के तहत संपत्ति की कुर्की को लेकर एक महत्वपूर्ण निर्णय दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि जांच एजेंसियों को संपत्ति कुर्क करने के लिए आरोपपत्र दाखिल करना अनिवार्य नहीं है, यदि उनके पास पर्याप्त सबूत हैं। यह फैसला 6,000 करोड़ रुपये के विदेशी मुद्रा घोटाले से जुड़े मामले में आया है, जहां व्यापारियों ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की कार्यवाही को चुनौती दी थी।
अदालत ने कहा कि कंपनी अधिनियम- 2013 के तहत गंभीर धोखाधड़ी जांच कार्यालय (एसएफआइओ) को जांच का हस्तांतरण, मनी लांड्रिंग प्रिवेंशन एक्ट-2002 के तहत समानांतर कार्यवाही पर रोक नहीं लगाता है। अदालत ने यह भी कहा कि एसएफआइओ का अधिकार केवल कंपनी अधिनियम के तहत अपराधों तक ही सीमित है और यह अन्य एजेंसियों को अन्य कानूनों के तहत अलग-अलग अपराधों की जांच करने से नहीं रोकता है।
याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया था कि अक्टूबर 2015 में केंद्र सरकार द्वारा मामला एसएफआइओ को सौंप दिए जाने के बाद, सीबीआइ और ईडी दोनों को समानांतर जांच जारी रखने से रोक दिया गया था। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि उनके खिलाफ दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) के तहत कोई आरोपपत्र दायर नहीं किया गया था।
हालांकि, मामले पर विचार करने के बाद पीठ ने व्यापारियों की दलीलों को खारिज कर दिया। पीठ ने फैसला सुनाया कि पीएमएलए के तहत कुर्की से पहले आरोपपत्र अनिवार्य नहीं है। यह फैसला ईडी जैसी जांच एजेंसियों को मनी लॉन्ड्रिंग के मामलों में तेजी से कार्रवाई करने की शक्ति देता है।
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