अभाविप के 71वें अधिवेशन में बांग्लादेशी घुसपैठ पर राष्ट्रव्यापी चिंता व्यक्त
देहरादून में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभाविप) के 71वें राष्ट्रीय अधिवेशन के दौरान एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव सत्र का आयोजन किया गया। इस सत्र में देश के विभिन्न ज्वलंत मुद्दों पर परिषद के विचार और सुझाव प्रस्तुत किए गए।
सत्र की शुरुआत में पहला प्रस्ताव पर्याप्त वित्तीय आवंटन सुनिश्चित करने और उसे एक समन्वित संरचना के अधीन लाने पर केंद्रित रहा। इस प्रस्ताव पर उपस्थित संशोधकों ने अपने-अपने सुझाव रखे, जिन्हें शामिल करने के बाद इसे सर्वसम्मति से पारित कर दिया गया।
प्रस्ताव सत्र का मुख्य आकर्षण दूसरा प्रस्ताव रहा, जो बांग्लादेशी घुसपैठ के गंभीर मुद्दे पर आधारित था। प्रस्ताव में स्पष्ट रूप से कहा गया कि देश में लगातार बढ़ती अवैध घुसपैठ राष्ट्रीय सुरक्षा, सामाजिक संरचना और देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए एक विकट चुनौती बन चुकी है। इस गंभीर समस्या पर तत्काल और प्रभावी कार्रवाई की आवश्यकता पर बल दिया गया।
इस प्रस्ताव पर देशभर से आए अभाविप के प्रतिनिधियों ने अपने विचार और सुझाव व्यक्त किए। विशेष रूप से, पूर्वोत्तर राज्यों के प्रतिनिधियों ने इस मुद्दे को म्यांमार सीमा से होने वाली आवाजाही तक विस्तारित करने का सुझाव दिया। उनका तर्क था कि पूर्वोत्तर राज्यों में म्यांमार सीमा से होने वाली लोगों की आवाजाही भी जनसांख्यिकीय दबाव और सुरक्षा की दृष्टि से एक अत्यंत महत्वपूर्ण मुद्दा है। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि इस समस्या को नीतिगत स्तर पर एक साथ संबोधित किया जाना चाहिए, ताकि समग्र समाधान निकाला जा सके।
अभाविप का यह अधिवेशन ऐसे समय में हुआ है जब राष्ट्रीय सुरक्षा और सीमा प्रबंधन देश के लिए प्रमुख चिंता का विषय बने हुए हैं। परिषद द्वारा उठाए गए ये मुद्दे देश के युवाओं की राष्ट्रीय सरोकारों के प्रति जागरूकता और उनकी सक्रिय भागीदारी को दर्शाते हैं।
