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भारतीय सेना की ताकत में इजाफा: इजरायल से खरीदे जाएंगे उन्नत हेरॉन एमके-2 ड्रोन

By Dec 3, 2025

भारत अपनी सैन्य शक्ति को लगातार मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, इजरायल से हेरॉन एमके-2 ड्रोन विमानों की अतिरिक्त खेप खरीदने के लिए सहमत हो गया है। यह समझौता आपातकालीन प्रावधानों के तहत किया गया है, जिससे देश की रक्षा तैयारियों में एक नई जान फूंकने की उम्मीद है। वर्तमान में ये उन्नत ड्रोन भारतीय थलसेना और वायुसेना के बेड़े का हिस्सा हैं, और अब इन्हें नौसेना में भी शामिल किया जाएगा, जिससे तीनों सैन्य शाखाओं की निगरानी और संचालन क्षमताओं में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।

इजरायली रक्षा उद्योग के सूत्रों के अनुसार, हेरॉन एमके-2 मध्यम ऊंचाई पर लंबे समय तक उड़ान भरने में सक्षम ड्रोन (MALE – Medium Altitude Long Endurance) है। यह ड्रोन 35,000 फुट की ऊंचाई तक उड़ सकता है और लगातार 45 घंटे तक हवा में रहकर विस्तृत निगरानी कर सकता है। इसकी यह क्षमता इसे सीमा पार की गतिविधियों पर पैनी नजर रखने और दुश्मन की हर हरकत को पकड़ने में अत्यंत प्रभावी बनाती है। वर्तमान में, इजरायली वायुसेना सहित दुनिया भर की 20 से अधिक सैन्य इकाइयां इस उन्नत ड्रोन का सफलतापूर्वक उपयोग कर रही हैं।

यह सौदा ‘मेक इन इंडिया’ पहल को भी बढ़ावा देगा, क्योंकि इजरायली कंपनी का इरादा न केवल इन ड्रोनों की आपूर्ति करना है, बल्कि भारत में ही इनका निर्माण भी करना है। इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण पर जोर दिया जाएगा और उत्पादन में 60 प्रतिशत से अधिक भारतीय सामग्री का उपयोग करने का लक्ष्य रखा गया है। यह भारतीय रक्षा विनिर्माण क्षेत्र के लिए एक बड़ा अवसर है, जो आत्मनिर्भरता की दिशा में देश के प्रयासों को बल देगा।

रक्षा मंत्रालय ने हाल ही में 87 एमएएलई ड्रोन की खरीद के लिए प्रस्ताव मांगा था, जिसमें ‘मेक इन इंडिया’ पर विशेष ध्यान दिया गया था। इस निविदा में कई अंतरराष्ट्रीय कंपनियों ने हिस्सा लिया था, लेकिन इजरायली कंपनी की ‘मेक इन इंडिया’ के प्रति प्रतिबद्धता और तकनीकी क्षमता ने उसे इस दौड़ में सबसे आगे रखा। यह साझेदारी भारत और इजरायल के बीच तीन दशक से अधिक समय से चली आ रही मजबूत रक्षा संबंधों का प्रमाण है।

इस बीच, यह भी खबर है कि भारत हवा में ईंधन भरने वाले छह विमानों की खरीद के लिए भी एक बड़ी निविदा पर काम कर रहा है, जिसमें ‘मेक इन इंडिया’ के तहत कम से कम 30 प्रतिशत स्थानीय सामग्री का उपयोग अनिवार्य है। इस 8,000 करोड़ रुपये के सौदे के लिए इजरायली कंपनी सबसे मजबूत दावेदार के रूप में उभरी है। यदि यह सौदा सफल होता है, तो कंपनी पुराने बोइंग-767 विमानों को टैंकर एयरक्राफ्ट में बदलकर भारत को आपूर्ति करेगी। भारतीय वायुसेना वर्तमान में रूसी मूल के इल्यूशिन Il-78 मिड-एयर रिफ्यूलिंग एयरक्राफ्ट पर निर्भर है, लेकिन अतिरिक्त क्षमता की आवश्यकता लंबे समय से महसूस की जा रही थी।

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