बरेली में खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता पर सवाल: 28 नमूने फेल, दो में जानलेवा रंग
त्योहारी सीजन के मद्देनज़र बरेली में खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए खाद्य सुरक्षा विभाग द्वारा चलाए गए विशेष अभियान की जांच रिपोर्ट ने चिंता बढ़ा दी है। सितंबर माह में शहर और ग्रामीण इलाकों के विभिन्न बाजारों से एकत्र किए गए खाद्य सामग्रियों के नमूनों की लैब रिपोर्ट 19 नवंबर को प्राप्त हुई, जिसमें कुल 28 नमूने मानकों पर खरे नहीं उतरे। इनमें से दो खाद्य सामग्रियों को सीधे तौर पर मानव स्वास्थ्य के लिए असुरक्षित करार दिया गया है।
खाद्य सुरक्षा विभाग के सहायक आयुक्त के अनुसार, मीरगंज के एक मिठाई विक्रेता की दुकान से लिए गए बूंदी लड्डू के नमूने में रंग की मात्रा सामान्य से लगभग ढाई गुना अधिक पाई गई। जहां लड्डू में रंग की अधिकतम स्वीकार्य सीमा 100 पीपीएम (पार्टिकल पर मिलियन) है, वहीं जांच में यह मात्रा करीब 240 पीपीएम दर्ज की गई। यह अत्यधिक रंग का प्रयोग स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकता है।
इसी प्रकार, फतेहगंज पश्चिमी के एक किराना स्टोर से लिए गए चायपत्ती के नमूने को भी असुरक्षित घोषित किया गया है। इस चायपत्ती में भी निर्धारित सीमा से काफी अधिक मात्रा में सिंथेटिक रंग का उपयोग किया गया है। अधिकारियों ने बताया कि चाय की पत्तियों में ऐसे सिंथेटिक रंगों का नियमित सेवन स्वास्थ्य पर दीर्घकालिक प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है।
लैब रिपोर्ट में कई अन्य नमूने भी अधोमानक पाए गए हैं। शहर के विभिन्न इलाकों से लिए गए बेसन लड्डू, आटे, पेड़ा, पनीर, खोया, बर्फी, भुजिया, नमकीन और अन्य मिठाइयों व तेलीय खाद्य पदार्थों के नमूनों में मिलावट, फैट की कमी, निम्न गुणवत्ता वाले तेल का प्रयोग और रंग की अधिकता जैसी खामियां पाई गई हैं।
खाद्य सुरक्षा विभाग ने सभी दुकानदारों और खाद्य उत्पादकों को चेतावनी दी है कि मिलावट और घटिया गुणवत्ता वाले खाद्य पदार्थ बेचने पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। विभाग जल्द ही इन मामलों में नोटिस जारी करने की प्रक्रिया शुरू करेगा। मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी ने बताया कि विभाग की टीमें बाजारों में निरंतर जांच कर रही हैं ताकि आम लोगों को सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण खाद्य पदार्थ मिल सकें। हाल ही में, एक टीम ने संदेह के आधार पर स्किम्ड मिल्क पाउडर का एक नमूना भी जांच के लिए प्रयोगशाला भेजा है।
