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इज्जतनगर बस अड्डा निर्माण कार्य अधर में, मार्च 2026 तक पूरा होना मुश्किल

By Nov 25, 2025

बरेली के इज्जतनगर में बन रहा नया बस अड्डा पांच साल बाद भी अधर में लटका हुआ है। परियोजना की धीमी गति और बार-बार आने वाली बाधाओं के चलते मार्च 2026 तक भी इसके पूरा होने की संभावना क्षीण नजर आ रही है। इस देरी का सीधा असर पुराने बस अड्डे और सेटेलाइट बस अड्डे पर यातायात के बढ़ते दबाव पर पड़ रहा है, जिससे शहर में जाम की स्थिति गंभीर हो रही है।

परिवहन निगम लग्जरी प्राइवेट बसों से प्रतिस्पर्धा के लिए एसी बसों की संख्या तो बढ़ा रहा है, लेकिन ढांचागत सुधारों की ओर अपेक्षित ध्यान नहीं दिया जा रहा है। इसी समस्या के समाधान के तौर पर घनी आबादी में स्थित पुराने बस अड्डे का लोड कम करने के लिए इज्जतनगर में नए बस अड्डे का निर्माण कार्य पांच साल पहले 2020 में शुरू हुआ था। शुरुआत में केंद्रीय कारागार की 2.285 हेक्टेयर भूमि हस्तांतरित की गई और 16.72 करोड़ रुपये की परियोजना को मंजूरी मिली।

हालांकि, निर्माण की जिम्मेदारी उत्तर प्रदेश स्टेट कंस्ट्रक्शन एंड इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कारपोरेशन लिमिटेड को सौंपने के बावजूद तीन साल तक बजट ही जारी नहीं हो सका। लगातार पत्राचार के बाद अगस्त 2023 में तीन करोड़ रुपये का बजट आवंटित होने पर काम शुरू हुआ, लेकिन बजट समाप्त होते ही काम फिर ठप पड़ गया। मार्च 2024 में दो करोड़ और फिर तीसरी किस्त में 3.90 करोड़ रुपये जारी हुए। कुल 8.90 करोड़ रुपये की लागत से विहंगम भवन तो बन गया, लेकिन शेष 40 फीसदी काम, जिसमें फर्नीचर, परिसर में टाइलीकरण और मेंटीनेंस जैसे कार्य शामिल हैं, बजट के अभाव में रुका रहा।

पिछले आठ महीनों से काम बंद है। अधूरे कार्यों को पूरा कराने के लिए सितंबर में 6.98 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया गया, लेकिन दो महीने बीत जाने के बाद भी टेंडर प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी है। हाल ही में वन एवं पर्यावरण मंत्री ने निरीक्षण कर मार्च तक काम पूरा कराने के निर्देश दिए थे, लेकिन कार्यदायी संस्था के अभियंता ने भी जून तक समय बढ़ाने की आवश्यकता जताई है, जिससे परियोजना के समय पर पूरा होने पर प्रश्नचिन्ह लग गया है।

इस नए बस अड्डे के बन जाने से दिल्ली, मुरादाबाद, नैनीताल और पीलीभीत की ओर जाने वाली बसों का संचालन यहां से होगा, जिससे पुराने बस अड्डों पर 50 फीसदी तक बोझ कम होने की उम्मीद है। इसी उम्मीद में पुराने बस अड्डा परिसर में ई-चार्जिंग सेंटर बनाने का प्रस्ताव भी भेजा गया है, हालांकि उसे अभी स्वीकृति नहीं मिली है। इस परियोजना में हो रही देरी से स्थानीय लोगों में निराशा है, जो एक आधुनिक बस अड्डे की सुविधा का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।

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