बिहार में शिक्षकों के लिए प्रखंड और विद्यालय आवंटन प्रक्रिया शुरू, गाइडलाइन जारी
बिहार में शिक्षकों के लिए प्रखंड और विद्यालय आवंटन की प्रक्रिया अब तेजी से शुरू होने जा रही है। राज्य शिक्षा विभाग ने इस संबंध में एक विस्तृत मार्गदर्शिका जारी कर दी है, जिससे शिक्षकों को अपनी पसंद के प्रखंड और विद्यालय में सेवा करने का अवसर मिलेगा। यह कदम शिक्षा व्यवस्था में सुधार लाने और शिक्षकों के मनोबल को बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है।
सूत्रों के अनुसार, प्रथम चरण में किन्हीं कारणों से जिन शिक्षकों को उनके मनपसंद जिले में आवंटन नहीं मिल सका था, उनसे दोबारा जिले के विकल्प मांगे गए थे। अब इन सभी शिक्षकों से आवंटित जिला अंतर्गत पांच प्रखंडों का ऑनलाइन विकल्प ई-शिक्षाकोष पोर्टल के माध्यम से 24 नवंबर से 5 दिसंबर 2025 तक लिया जाएगा। यह प्रक्रिया शिक्षकों को उनके गृह जिले या पसंद के क्षेत्र में पदस्थापित करने में सहायक होगी।
जिलाधिकारी की अध्यक्षता में गठित स्थापना समिति सॉफ्टवेयर के माध्यम से प्रखंडवार, कक्षावार और विषयवार रिक्तियों का आकलन कर 10 से 15 दिसंबर 2025 तक प्रखंड आवंटन का कार्य पूरा करेगी। यह महत्वपूर्ण है कि जो शिक्षक पांचों प्रखंडों का विकल्प नहीं देंगे, उनका जिला आवंटन स्वतः निरस्त कर दिया जाएगा और वे अपने पूर्व के जिले-विद्यालय में ही पदस्थापित माने जाएंगे।
शिक्षकों की पदस्थापना को लेकर जारी शेड्यूल के अनुसार, प्रखंड आवंटन के उपरांत 16 से 31 दिसंबर 2025 तक विद्यालय आवंटन की प्रक्रिया संपन्न होगी। इस आवंटन में प्राथमिकता क्रम का विशेष ध्यान रखा जाएगा। सबसे पहले नियमित शिक्षक, फिर विशिष्ट शिक्षक और उसके बाद विद्यालय अध्यापक (टीआरई-1 एवं टीआरई-2) को वरीयता दी जाएगी। व्यक्तिगत प्राथमिकताओं में दिव्यांग महिला, दिव्यांग पुरुष, सामान्य महिला और अंत में सामान्य पुरुष शिक्षकों को उनकी उम्र के आधार पर स्थान मिलेगा।
विद्यालयों में शिक्षकों की पदस्थापना को लेकर अधिकारियों ने बताया कि जिले में यह सुनिश्चित किया जाएगा कि जिन विद्यालयों में विषयवार पूर्ण रिक्तियां हैं, वहां पहले शिक्षक भेजे जाएं। किसी विषय के लिए तब तक दो शिक्षक नहीं दिए जाएंगे, जब तक कि सभी विद्यालयों में उस विषय का न्यूनतम एक शिक्षक उपलब्ध न हो जाए। विद्यालयों का छात्र-शिक्षक अनुपात भी स्क्रीन पर प्रदर्शित होगा, ताकि जहां आवश्यकता अधिक है, वहां पहले पदस्थापन सुनिश्चित हो सके।
विद्यालय आवंटन के बाद जारी आदेश में निर्धारित तिथि तक शिक्षकों को अपने आवंटित विद्यालय में योगदान करना अनिवार्य होगा। शिक्षा विभाग के आलाधिकारियों ने सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिया है कि इस पूरी प्रक्रिया को अत्यंत पारदर्शी, समयबद्ध और सॉफ्टवेयर-आधारित तरीके से संपन्न कराया जाए। मार्गदर्शिका का अक्षरशः पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं ताकि किसी भी स्तर पर कोई गड़बड़ी न हो।
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