बिहार में सरकार गठन पर गहमागहमी तेज, नीतीश कुमार के CM पद पर सस्पेंस बरकरार
बिहार विधानसभा चुनाव में एनडीए की प्रचंड जीत के बाद राज्य में नई सरकार के गठन को लेकर राजनीतिक गहमागहमी तेज हो गई है। सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या मौजूदा मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ही दोबारा इस पद पर काबिज होंगे या किसी और नाम पर मुहर लगेगी। इन अटकलों के बीच, विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं के बयान लगातार सामने आ रहे हैं, जो सियासी माहौल को गरमा रहे हैं।
राष्ट्रीय लोक मोर्चा के प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा ने इन सभी अटकलों पर विराम लगाने की कोशिश की है। पटना में एक बयान जारी करते हुए उन्होंने कहा, “हमने जनता का आभार व्यक्त किया है। नई सरकार बनाने की औपचारिकताएं जल्द पूरी होंगी और 2-4 दिनों में सारी स्थिति स्पष्ट हो जाएगी।” कुशवाहा ने जोर देकर कहा, “हमने बार-बार कहा है कि नीतीश कुमार मुख्यमंत्री थे, हैं और रहेंगे।” उनके इस बयान से एनडीए खेमे में मुख्यमंत्री पद को लेकर चल रही चर्चाओं को कुछ हद तक शांत करने का प्रयास किया गया है।
एक तरफ जहां एनडीए सरकार गठन की तैयारियों में जुटी है, वहीं दूसरी तरफ राष्ट्रीय जनता दल (राजद) में आंतरिक कलह की खबरें सामने आ रही हैं। लालू परिवार में कथित फूट ने सियासी हलचल मचा दी है। राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव की बेटी रोहिणी आचार्य द्वारा की गई एक सोशल मीडिया पोस्ट ने इस पूरे मामले को और गरमा दिया है, जिसके बाद राजनीतिक बयानबाजी का दौर शुरू हो गया है।
भाजपा नेता सैयद शाहनवाज़ हुसैन ने इस पर टिप्पणी करते हुए कहा कि राजद ने पहले भी तेज प्रताप यादव को अपने परिवार से अलग किया था, और अब रोहिणी आचार्य ने भी पार्टी से अलग होने की बात कही है। उन्होंने इसे राजद का पारिवारिक मामला बताया। वहीं, केंद्रीय मंत्री और एलजेपी (रामविलास) प्रमुख चिराग पासवान ने इस मुद्दे पर सीधी टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा, “मैं इस पर कोई टिप्पणी नहीं करूंगा। हमारे राजनीतिक मतभेद जरूर हैं, लेकिन मैंने हमेशा लालू प्रसाद यादव के परिवार को अपना परिवार माना है।” राजद नेता मृत्युंजय तिवारी ने भी इसे पारिवारिक मामला बताते हुए कहा कि परिवार के सदस्य ही इसका जवाब देंगे और पार्टी का शीर्ष नेतृत्व पूरे मामले को देखेगा। उन्होंने यह भी जोड़ा कि चुनाव परिणामों के कारणों की समीक्षा की जाएगी।
महागठबंधन की हार पर भी लगातार टिप्पणियां आ रही हैं, और कांग्रेस भी अपनी हार का विश्लेषण करने में जुटी है। बिहार की राजनीति में अगले कुछ दिन बेहद महत्वपूर्ण रहने वाले हैं, जहां एक ओर नई सरकार का स्वरूप स्पष्ट होगा, वहीं दूसरी ओर विपक्षी खेमे में चल रही अंदरूनी उठापटक भी खुलकर सामने आएगी।
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