बदरीनाथ धाम के कपाट बंदी की प्रक्रिया शुरू, गणेश मंदिर के द्वार हुए बंद
देवभूमि उत्तराखंड के प्रसिद्ध बदरीनाथ धाम में शीतकाल के लिए कपाट बंद करने की प्रक्रिया विधिवत रूप से शुरू हो गई है। शुक्रवार को पंच पूजा के प्रथम चरण के तहत भगवान गणेश के मंदिर के कपाट बंद कर दिए गए। यह प्रक्रिया 25 नवंबर को दोपहर बाद 2 बजकर 56 मिनट पर बदरीनाथ धाम के मुख्य मंदिर के कपाट बंद होने के साथ पूर्ण होगी।nnपरंपरा के अनुसार, कपाट बंद करने से पूर्व बदरीनाथ धाम में पंच पूजा का विधान है। इसी कड़ी में, शुक्रवार को रावल, धर्माधिकारी और वेदपाठी की मौजूदगी में भगवान गणेश के विग्रह को परिक्रमा स्थल स्थित मंदिर से बदरीनाथ मंदिर के गर्भगृह में दर्शन के लिए ले जाया गया। दिनभर भगवान नारायण के साथ भगवान गणेश की पूजा-अर्चना की गई और शाम पांच बजे गणेश मंदिर के कपाट बंद कर दिए गए।nnश्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के अध्यक्ष ने बताया कि कपाट बंद करने की तैयारियां पूरी हो चुकी हैं और इस अवसर को लेकर श्रद्धालुओं में खासा उत्साह देखा जा रहा है। इस धार्मिक अनुष्ठान के साक्षी बनने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु बदरीनाथ धाम पहुंचे हैं। इस दौरान मंदिर समिति के उपाध्यक्ष, मुख्य कार्याधिकारी, प्रभारी अधिकारी, मंदिर अधिकारी, प्रशासनिक अधिकारी और अन्य गणमान्य व्यक्ति भी उपस्थित रहे।nnपंच पूजा के अगले चरण में शनिवार को आदिकेदारेश्वर और आदि शंकराचार्य मंदिर के कपाट भी बंद किए जाएंगे। यह प्रक्रिया बदरीनाथ धाम की शीतकालीन यात्रा के समापन का प्रतीक है, जिसके बाद अगले छह माह तक मंदिर के कपाट बंद रहेंगे और भगवान के दर्शन हिम क्षेत्र के बाहर स्थापित मंदिरों में होंगे।
