Ambedkar news: बाबा साहब का बौद्ध धर्म ग्रहण करना सामाजिक क्रांति का प्रतीक था
डॉ. बीआर अंबेडकर द्वारा बौद्ध धर्म को अपनाना केवल एक धार्मिक बदलाव नहीं था, बल्कि यह एक सामाजिक, नैतिक और दार्शनिक क्रांति का प्रतीक था। यह बात अलीगढ़ में धम्मभूमि के बैनर तले आयोजित एक सेमिनार में वक्ताओं ने कही। वक्ताओं ने जोर दिया कि अंबेडकर का यह कदम जातीय भेदभाव, धार्मिक पाखंड और शोषण के खिलाफ एक मजबूत चेतावनी थी।
सेमिनार में मुख्य अतिथि राजकुमार भाटी ने कहा कि बाबा साहब ने अपना पूरा जीवन न्याय, समानता और मानव गरिमा की स्थापना के लिए समर्पित कर दिया। उन्होंने कहा कि 14 अक्टूबर 1956 को अंबेडकर ने जो मार्ग चुना, वह आज भी प्रासंगिक है। यह कदम एक समतामूलक समाज की स्थापना की दिशा में उठाया गया था।
बिहार के पूर्व विधायक सतीश दास ने कहा कि आज पूरा भारत बाबा साहब के दिखाए मार्ग की ओर देख रहा है। उन्होंने कहा कि देश और दुनिया को सुख-शांति और समृद्धि के लिए बुद्ध के मार्ग पर ही चलना होगा, जहां समता, बंधुता और न्याय के सपने को साकार किया जा सकता है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता एससी, एसटी ऑल इंडिया फेडरेशन के महासचिव केपी चौधरी ने की। इस दौरान युवा कवित्री वंदना सिद्धार्थ ने कविता पाठ किया और मिशनरी गायक शशि भूषण ने बाबा साहब के जीवन से संबंधित सांस्कृतिक प्रस्तुति दी।
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