आगरा बाह: बटेश्वर में विकास, बीहड़ में इंतजार – विधायक रिपोर्ट कार्ड
आगरा की बाह विधानसभा क्षेत्र में विकास को लेकर एक विरोधाभासी स्थिति बनी हुई है। एक ओर, पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की पैतृक स्थली बटेश्वर में शिव मंदिरों, घाटों और प्राचीन कुंडों का जीर्णोद्धार हुआ है, साथ ही अटल संकुल का निर्माण भी पूरा हो चुका है। यहां 10 करोड़ रुपये की विशेष योजना भी स्वीकृत है।
इसके विपरीत, चंबल और यमुना के बीहड़ में बसे सुनसार, झरनापुर, गुढ़ा, गुढ़ियाना, रानीपुरा जैसे कई गांव आज भी आजादी के 79 साल बाद पक्के रास्तों के लिए तरस रहे हैं। इन गांवों में उद्योग-धंधों का अभाव है और युवा रोजगार की तलाश में पलायन को मजबूर हैं। खेल-कूद के लिए स्टेडियम और गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए बड़े अस्पताल की कमी भी एक बड़ी समस्या है, जिसके चलते मरीजों को इलाज के लिए आगरा या सैफई जैसे शहरों की दूरी तय करनी पड़ती है।
क्षेत्र की वर्तमान विधायक, जो दूसरी बार निर्वाचित हुई हैं, ने अपने कार्यकाल में 450 करोड़ रुपये से अधिक के विकास कार्यों का दावा किया है। वह बीहड़ क्षेत्र में पर्यावरणीय बंदिशों का हवाला देते हुए इन समस्याओं के समाधान के लिए प्रयासरत होने की बात कहती हैं। हालांकि, स्थानीय निवासियों का कहना है कि चुनाव के समय किए गए वादे अक्सर पूरे नहीं होते।
बाह विधानसभा क्षेत्र, जो 1952 में अस्तित्व में आया था, छह दशक से जिला बनाने की मांग भी अधूरी है। चंबल नदी पर नंदगांव और पिनाहट में बन रहे पुलों के संपर्क मार्गों की समस्या भी बनी हुई है। इस क्षेत्र में डकैतों का आतंक भले ही समाप्त हो गया हो, लेकिन स्वास्थ्य सेवाओं की समुचित व्यवस्था आज तक नहीं हो पाई है।
