कोविड के बाद देश में तीन गुना बढ़ा ‘Vascular Necrosis’ का खतरा, युवा सर्वाधिक प्रभावित
देशभर में कोविड-19 महामारी के बाद स्वास्थ्य संबंधी कई नई चुनौतियाँ सामने आई हैं, जिनमें ‘वैस्कुलर नेक्रोसिस’ (AVN) के मामलों में चिंताजनक वृद्धि प्रमुख है। चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, कोविड संक्रमण के बाद इस गंभीर हड्डी रोग के मामले तीन गुना तक बढ़ गए हैं। वैस्कुलर नेक्रोसिस एक ऐसी स्थिति है जहाँ कूल्हे की हड्डी तक रक्त की आपूर्ति बाधित हो जाती है, जिससे हड्डी के ऊतक धीरे-धीरे मरने लगते हैं। परिणामस्वरूप, हड्डी कमजोर होकर ढह जाती है और कूल्हा खराब हो जाता है। यह स्थिति अब राष्ट्रीय स्तर पर एक महत्वपूर्ण स्वास्थ्य चिंता बन गई है, खासकर युवाओं में इसका बढ़ता प्रकोप अधिक चिंताजनक है।
कोविड और जीवनशैली का प्रभाव
विशेषज्ञों का मानना है कि कोविड संक्रमण के बाद शरीर में रक्त संचार कम होने और खून के थक्के बनने की प्रवृत्ति बढ़ने से वैस्कुलर नेक्रोसिस का जोखिम बढ़ा है। ये थक्के रक्त प्रवाह को अवरुद्ध कर देते हैं, जिससे हड्डियों तक पर्याप्त ऑक्सीजन और पोषक तत्व नहीं पहुँच पाते। इसके अतिरिक्त, शराब, तंबाकू या किसी भी प्रकार के नशे की लत इस प्रक्रिया को और तेज कर सकती है, जिससे थक्के तेजी से बनते हैं। कुछ गंभीर मामलों में तो मरीजों के हाथ और पैर काटने तक की नौबत आ जाती है। वर्तमान में, सभी प्रकार की हिप सर्जरी में लगभग 10 प्रतिशत मामले वैस्कुलर नेक्रोसिस के होते हैं, जिनमें 60 प्रतिशत पुरुष और 40 प्रतिशत महिलाएँ शामिल हैं।
युवाओं पर सर्वाधिक असर और उपचार के विकल्प
यह बीमारी सबसे ज्यादा 25 से 35 साल तक के युवाओं को प्रभावित कर रही है, जो एक स्वस्थ और सक्रिय जीवनशैली जीने की उम्र होती है। प्रारंभिक चरणों में, स्टेम सेल थेरेपी से इसका इलाज संभव है, लेकिन यदि बीमारी बढ़ जाती है तो कूल्हा प्रत्यारोपण ही एकमात्र विकल्प बचता है। इस बीमारी का बढ़ता प्रसार युवाओं की कार्यक्षमता और जीवन की गुणवत्ता पर गहरा नकारात्मक प्रभाव डाल रहा है।
हड्डियों के स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण सुझाव
वैस्कुलर नेक्रोसिस के अलावा, लोगों में ‘पीक बोन मास’ की क्षति भी लगातार देखी जा रही है, जो आमतौर पर 25-30 साल की उम्र में बनता है जब हड्डियाँ सबसे मजबूत होती हैं। विटामिन-डी की कमी, फास्ट फूड का अत्यधिक सेवन और दूध जैसे कैल्शियम युक्त पदार्थों का अभाव हड्डियों को कमजोर कर रहा है। इससे नाक-नी, बो-लेग, साइड स्वीप जैसी समस्याएँ और बाद में ऑस्टियोपोरोसिस जैसी बीमारियाँ हो सकती हैं, जिससे सभी जोड़ों में दर्द रहने लगता है।
घुटनों के दर्द से बचाव और व्यायाम
वजन कम करने के लिए की जाने वाली कुछ भारी कसरत जैसे तेज रफ्तार में सीढ़ियाँ चढ़ना-उतरना, साइकिल चलाना या तेज दौड़ना घुटनों पर अत्यधिक दबाव डालता है। देसी शौचालय का उपयोग भी घुटनों पर समान दबाव डालता है, जिससे घुटनों के कटोरे जल्दी घिस जाते हैं और तरल तत्व खत्म होने लगते हैं। इन गतिविधियों से बचने और हड्डियों के स्वास्थ्य को बनाए रखने के लिए प्रतिदिन 45 मिनट सुबह की धूप लेना और उचित सप्लीमेंट लेना आवश्यक है। घुटनों में दर्द की शिकायत होने पर, सुबह हाथ आगे करके धीरे-धीरे बैठने और उठने का व्यायाम 10 बार करने से मांसपेशियों को रक्त की आपूर्ति तेज होती है और हड्डियों को पर्याप्त पोषण मिलता है। इस व्यायाम को शुरुआत में धीरे-धीरे करें और फिर गति बढ़ा सकते हैं।
