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गीता जयंती 2025: 1 दिसंबर को मनाई जाएगी, जानें क्या करें और क्या नहीं

By Nov 26, 2025

इस वर्ष 1 दिसंबर को पवित्र गीता जयंती का पर्व मनाया जाएगा। यह वह पावन दिन है जब भगवान श्रीकृष्ण ने कुरुक्षेत्र के युद्ध क्षेत्र में अपने प्रिय शिष्य अर्जुन को जीवन का सार बताते हुए भगवद गीता का ज्ञान प्रदान किया था। हिंदू धर्म में गीता जयंती का अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है, क्योंकि गीता केवल एक ग्रंथ नहीं, बल्कि जीवन जीने की कला सिखाने वाला मार्गदर्शक है।

हर वर्ष यह पर्व मार्गशीर्ष मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को मनाया जाता है, जिसे मोक्षदा एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। इस एकादशी को मोक्ष प्रदान करने वाली माना गया है, और इसी दिन गीता के ज्ञान का प्रकाश फैला, इसलिए इसे गीता जयंती के रूप में मनाया जाता है। यह पर्व उन सभी के लिए विशेष है जो जीवन की उलझनों से मुक्ति पाना चाहते हैं और आध्यात्मिक शांति की तलाश में हैं।

गीता जयंती के इस शुभ अवसर पर कुछ विशेष कार्यों को करने से व्यक्ति को लाभ मिल सकता है। माना जाता है कि इस दिन गीता का पाठ करना, भगवान श्रीकृष्ण की पूजा करना और उनके उपदेशों को अपने जीवन में उतारने का प्रयास करना अत्यंत फलदायी होता है। इस दिन दान-पुण्य करने का भी विशेष महत्व है। सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि से निवृत होकर भगवान श्रीकृष्ण और गीता का स्मरण करना चाहिए। पूजा में धूप, दीप, फल और फूल अर्पित करने चाहिए।

इसके अतिरिक्त, इस दिन सात्विक भोजन ग्रहण करना और मन को शांत रखना चाहिए। किसी भी प्रकार के वाद-विवाद या क्रोध से बचना चाहिए। गीता जयंती का पर्व हमें सिखाता है कि कैसे हम अपने कर्मों से भयमुक्त होकर, निष्काम भाव से कार्य करते हुए जीवन में सुख और शांति प्राप्त कर सकते हैं। यह दिन हमें अपने कर्तव्यों का बोध कराता है और सही मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।

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