सेना में मिशनरी कट्टरता पर विहिप की चिंता, सर्वोच्च न्यायालय ने लगाई रोक
विश्व हिंदू परिषद (विहिप) ने भारतीय सेना में मिशनरी कट्टरता की घुसपैठ के प्रयासों पर गहरी चिंता व्यक्त की है। संगठन ने इस प्रकार की कट्टरता को देश की सुरक्षा के लिए एक गंभीर खतरा करार देते हुए इस पर तत्काल रोक लगाए जाने की आवश्यकता पर बल दिया है।
विश्व हिंदू परिषद के राष्ट्रीय प्रवक्ता ने कहा कि हाल ही में सर्वोच्च न्यायालय ने एक ऐसे मामले में हस्तक्षेप किया, जहां एक सैन्य अधिकारी ने ईसाई धर्म की मान्यताओं का हवाला देते हुए अपनी रेजीमेंट के नियमों का पालन करने से इनकार कर दिया था। इस मामले में न्यायालय ने धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार और सेना के अनुशासन तथा नियमों के बीच संतुलन पर महत्वपूर्ण टिप्पणी की। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार असीमित नहीं है और यह सेना के नियमों एवं राष्ट्र की सुरक्षा पर हावी नहीं हो सकता।
सूत्रों के अनुसार, विहिप प्रवक्ता ने इस घटना पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि यह बेहद विचारणीय और चिंताजनक है कि कुछ असामाजिक तत्व या समूह धार्मिक कट्टरता को सेना जैसे राष्ट्रीय संस्थान में फैलाने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि जो व्यक्ति ‘राष्ट्र सर्वोपरि’ की भावना को नहीं मानता, वह सेना में सेवा करने के योग्य नहीं हो सकता। यह कट्टरता देश की एकता और अखंडता के लिए भी एक बड़ा खतरा है।
न्यायालय ने इस मामले में यह भी कहा कि गुरुद्वारा जैसे स्थान पंथनिरपेक्ष होते हैं और संविधान का अनुच्छेद 25 अनिवार्य धार्मिक परंपराओं की रक्षा करता है, न कि हर भावना की। न्यायालय ने यह भी सवाल उठाया कि ईसाई धर्म में मंदिर या गुरुद्वारा प्रवेश वर्जित कहां है। यह मामला सेना के भीतर अनुशासन और राष्ट्रीय एकता बनाए रखने के महत्व को रेखांकित करता है। विहिप ने सर्वोच्च न्यायालय के इस कदम का स्वागत किया है और उम्मीद जताई है कि इस तरह की कट्टरता को सेना से पूरी तरह समाप्त किया जाएगा।
