चेक बाउंस नैतिक पतन नहीं: हाईकोर्ट ने मृत कर्मचारी के परिवार को दिया न्याय
पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि निजी क्षमता में जारी किया गया चेक बाउंस होना नैतिक पतन के समान अपराध नहीं माना जा सकता। अदालत ने इस सिद्धांत को स्थापित करते हुए एक मृत चौकीदार के परिवार को न्याय दिलाया और संबंधित विभाग को कड़ी फटकार लगाई।
यह मामला फिरोजपुर निवासी एक चौकीदार की पत्नी और बेटे द्वारा दायर याचिका से जुड़ा था। याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया था कि चेक बाउंस के मामले में दोषी ठहराए जाने के आधार पर उन्हें 2020 में अनुचित तरीके से नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया था। इसके बाद, परिवार को ग्रेच्युटी और लीव एनकैशमेंट जैसे सेवा लाभों का भुगतान करने से भी मना कर दिया गया था।
न्यायमूर्ति हरप्रीत सिंह बराड़ की एकल पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि चेक बाउंस का यह मामला कर्मचारी की व्यक्तिगत आर्थिक कठिनाइयों से जुड़ा था, न कि किसी आपराधिक इरादे से। अदालत ने इस बात पर जोर दिया कि इस मामले में किसी भी प्रकार का भ्रष्टाचार शामिल नहीं था और न ही निगम को नुकसान पहुंचाने का कोई प्रयास किया गया था। इसलिए, इसे नैतिक पतन जैसे गंभीर अपराधों की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता।
अदालत ने यह भी स्वीकार किया कि पूर्व में सजा होने के बाद अचानक नौकरी से निकाले जाने के कारण कर्मचारी गंभीर आर्थिक संकट में आ गया था और वह कर्ज लेकर अपना गुजारा कर रहा था। कोर्ट ने कार्मिक विभाग द्वारा 24 जनवरी 2023 को जारी की गई सूची का हवाला देते हुए कहा कि नैतिक पतन के अपराधों में भ्रष्टाचार, नशीली दवाओं की तस्करी, मनी लॉन्ड्रिंग, बच्चों के खिलाफ यौन अपराध, मानव तस्करी और हथियारों से संबंधित अपराध शामिल हैं, जबकि चेक बाउंस इनमें से किसी भी श्रेणी में नहीं आता।
अदालत ने बर्खास्तगी के आदेश और परिवार द्वारा सेवा लाभों के भुगतान की मांग को खारिज करने वाले पूर्व के आदेशों को रद्द कर दिया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि केवल चेक बाउंस अधिनियम के तहत मिली सजा के आधार पर सेवा लाभों को रोकना कानूनी रूप से गलत है। अदालत ने याचिका स्वीकार करते हुए मृत कर्मचारी के परिवार को सभी बकाया सेवा लाभ ब्याज सहित भुगतान करने का निर्देश दिया। साथ ही, परिवार के बेटे के मामले को सहानुभूतिपूर्ण नीति के तहत देखने का भी निर्देश दिया गया है, ताकि परिवार को कुछ राहत मिल सके।
