धर्मेंद्र का बिहार से अनोखा नाता: छठ पर्व में आस्था, भोजपुरी फिल्मों में अभिनय
बॉलीवुड के ‘ही मैन’ के नाम से मशहूर, अपने समय के सुपरस्टार धर्मेंद्र का भले ही बिहार से सीधा जुड़ाव न रहा हो, लेकिन उनकी संस्कृति, भाषा और पर्वों के प्रति गहरी आस्था हमेशा से दिखती रही है। यह स्नेह और जुड़ाव केवल बातों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उन्होंने भोजपुरी फिल्मों में अभिनय कर इसे और पुख्ता किया है।
धर्मेंद्र ने ‘इंसाफ की देवी’ और ‘देस परदेस’ जैसी कई भोजपुरी फिल्मों में अपने अभिनय का जलवा बिखेरा है। इन फिल्मों के माध्यम से उन्होंने बिहार की भाषा और संस्कृति को और अधिक लोगों तक पहुंचाया। ‘देस परदेस’ फिल्म में उन्होंने पावर स्टार पवन सिंह के पिता की भूमिका निभाई थी।
पवन सिंह ने धर्मेंद्र के साथ काम करने के अनुभव को साझा करते हुए बताया था कि कैसे ‘धरम जी’ ने उन्हें एक अनमोल सीख दी थी। फिल्म की शूटिंग के दौरान, जब पवन सिंह अपने करियर के शुरुआती दौर में थे और उनमें स्टारडम की झलक दिखने लगी थी, तब धर्मेंद्र ने उन्हें अपनी वैनिटी वैन में बुलाकर नसीहत दी थी। उन्होंने कहा था, “पैर जमीन पर टिकाकर बढ़ना, सीना चौड़ा करके चलना लेकिन सिर हमेशा झुका होना चाहिए।” यह सीख पवन सिंह के लिए जिंदगी का मूलमंत्र बन गई और उन्होंने इसे हमेशा याद रखा।
यह घटना न केवल धर्मेंद्र के जमीन से जुड़े स्वभाव को दर्शाती है, बल्कि बिहार के कलाकारों के प्रति उनके स्नेह को भी उजागर करती है। धर्मेंद्र की यह सीख आज भी कई युवा कलाकारों के लिए प्रेरणा का स्रोत है।
इसके अलावा, धर्मेंद्र की आस्था छठ पर्व में भी गहरी रही है। हालांकि वे बिहार में कभी नहीं आए, लेकिन इस पर्व की महत्ता और इससे जुड़ी धार्मिक मान्यताओं के प्रति उनका सम्मान स्पष्ट रूप से झलकता है। यह जुड़ाव दर्शाता है कि कला और संस्कृति की कोई सीमा नहीं होती और सच्चे दिल से की गई आस्था किसी भी भौगोलिक सीमा को पार कर सकती है। धर्मेंद्र का यह ‘बिहार कनेक्शन’ उनकी बहुआयामी शख्सियत का एक और पहलू उजागर करता है, जो उन्हें दर्शकों के दिलों में खास जगह दिलाता है।
