आगरा में सपा नेतृत्वविहीन: कार्यकारिणी भंग, चुनावी तैयारी पर ग्रहण
आगरा में समाजवादी पार्टी (सपा) संगठन अभी भी नेतृत्व की राह देख रहा है। प्रदेश अध्यक्ष द्वारा जून माह में जिला व महानगर कार्यकारिणी को भंग किए जाने के छह महीने बीत चुके हैं, लेकिन अभी तक नई कार्यकारिणी की घोषणा नहीं हो पाई है। इस देरी के कारण पार्टी की चुनावी तैयारी बुरी तरह प्रभावित हो रही है, खासकर 2027 में होने वाले विधानसभा चुनावों को देखते हुए।
सूत्रों के अनुसार, प्रदेश अध्यक्ष श्यामलाल पाल ने जून में यह कार्रवाई करते हुए न केवल जिला और महानगर कार्यकारिणी को भंग किया, बल्कि प्रदेश कार्यकारिणी और विभिन्न फ्रंटल संगठनों में शामिल आगरा के पदाधिकारियों और सदस्यों को भी उनके पदों से हटा दिया था। इसके बाद से ही नई कार्यकारिणी के गठन को लेकर अटकलें लगाई जा रही थीं। पहले नवरात्र और फिर दीपावली तक घोषणा की उम्मीदें थीं, लेकिन दोनों ही अवसर बीत गए और अभी तक कोई नई सूची जारी नहीं हुई है।
आगरा में सपा वर्ष 1992 से ही अपनी पकड़ मजबूत करने का प्रयास कर रही है। हालांकि, वर्ष 1999 और 2004 में फिल्म अभिनेता राज बब्बर ने सपा के टिकट पर लोकसभा चुनाव जीते थे, जिसमें उनकी व्यक्तिगत लोकप्रियता का बड़ा योगदान था। पिछले लोकसभा चुनाव में कांग्रेस से गठबंधन के चलते सपा प्रत्याशी ने बेहतर प्रदर्शन कर दूसरा स्थान हासिल किया था।
वर्तमान स्थिति में, जब विधानसभा चुनावों में डेढ़ वर्ष से भी कम का समय बचा है, पार्टी का नेतृत्वविहीन होना चिंताजनक है। विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआइआर) के लिए बीएलए (ब्लॉक लेवल एजेंट) बनाने जैसे महत्वपूर्ण कार्यों में भी पार्टी पिछड़ गई है।
हालांकि, निवर्तमान जिलाध्यक्ष श्रीकृष्ण वर्मा ने बताया कि आगरा ग्रामीण विधानसभा सीट को छोड़कर जिले की अन्य पांचों सीटों पर बीएलए और प्रभारियों की तैनाती कर दी गई है। इसी तरह, निवर्तमान महानगर अध्यक्ष चौधरी वाजिद निसार ने भी कहा है कि महानगर की तीनों सीटों पर बीएलए बना दिए गए हैं और उन्हें एसआइआर प्रक्रिया के तहत पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) मतदाताओं के फार्म भरवाने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इसके बावजूद, एक संगठित नेतृत्व की कमी चुनावी रणनीति को अमलीजामा पहनाने में बाधा बन रही है।
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