ग्रेटर नोएडा का सूरजपुर वेटलैंड बना जैव विविधता का अनमोल खजाना
ग्रेटर नोएडा का सूरजपुर वेटलैंड, जो कभी एक सामान्य आर्द्रभूमि थी, आज वन्यजीवों के लिए एक सुरक्षित स्वर्ग के रूप में उभरकर सामने आया है। यहाँ की प्राकृतिक सुंदरता और शांत वातावरण न केवल स्थानीय वन्यजीवों को आकर्षित कर रहा है, बल्कि दूर-दराज से आने वाले प्रवासी पक्षियों के लिए भी एक महत्वपूर्ण पड़ाव बन गया है। पिछले कुछ वर्षों में, इस वेटलैंड में नीलगाय, अजगर, हिरण और सियार जैसे विभिन्न वन्यजीवों की आबादी में अभूतपूर्व वृद्धि देखी गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह सकारात्मक बदलाव संरक्षण के प्रति समर्पित प्रयासों और प्रभावी जल प्रबंधन तकनीकों का परिणाम है। लगभग 60 हेक्टेयर के प्राकृतिक झील क्षेत्र वाला यह वेटलैंड मुख्य रूप से बारिश के पानी पर निर्भर है और मानसून के दौरान अपने जल स्तर को सफलतापूर्वक पुनः प्राप्त करता है।
वर्ष 2010 से, वन विभाग, वर्ल्ड वाइल्डलाइफ फंड (डब्ल्यूडब्ल्यूएफ) इंडिया और ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के बीच सहयोगात्मक प्रयासों ने इस आर्द्रभूमि के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इन संयुक्त पहलों में जल संरक्षण, प्रदूषण नियंत्रण और प्राकृतिक आवासों के पुनर्निर्माण जैसे कार्य शामिल हैं। इन प्रयासों के परिणामस्वरूप, सूरजपुर वेटलैंड अब नीलगाय, विभिन्न प्रकार के सांपों, रंग-बिरंगी तितलियों, जंगली सूअरों और चंचल गिलहरियों जैसे जीवों का घर बन गया है।
वन विभाग के अधिकारियों द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, यहाँ स्तनधारी जीवों की कई प्रजातियाँ पाई जाती हैं। विशेष रूप से, नीलगाय की आबादी में भारी वृद्धि दर्ज की गई है; जो 2019 में लगभग 50 थी, वह बढ़कर अब लगभग 400 हो गई है। इसी तरह, सियार, पांच-धारी वाली गिलहरी और जंगली सूअर जैसे अन्य स्तनधारी भी काफी संख्या में बढ़े हैं। सरीसृप वर्ग में, यहाँ अजगरों की उपस्थिति भी दर्ज की गई है।
जैव विविधता के मामले में, सूरजपुर वेटलैंड तितलियों की 52 प्रजातियों और 200 से अधिक पौधों की प्रजातियों का घर है। हाल ही में, एशियन वॉटरबर्ड सेंसस 2023 के दौरान, यहाँ 3,000 से अधिक जलपक्षी दर्ज किए गए थे, जो इस क्षेत्र के पारिस्थितिक महत्व को दर्शाता है।
हाल ही में, जिला मजिस्ट्रेट मेधा रूपम ने सूरजपुर वेटलैंड का दौरा किया और इसे एक इको-टूरिज्म मॉडल के रूप में विकसित करने की दिशा में कदम उठाने के निर्देश दिए। इस योजना के तहत, क्षेत्र में नेचर ट्रेल्स, वॉचटावर और एक इंटरप्रिटेशन सेंटर का निर्माण किया जा रहा है। इस पहल का उद्देश्य पर्यटकों को वन्यजीवों की दुर्लभ झलक देखने का अवसर प्रदान करना और साथ ही स्थानीय समुदायों के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा करना है। वन अधिकारी रजनीकांत मित्तल के अनुसार, यह विकास इस क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा, जो प्रकृति संरक्षण और आर्थिक विकास के बीच संतुलन स्थापित करेगा।
