नया श्रम कानून: नियोक्ताओं को छंटनी की छूट, श्रमिक अधिकारों पर संकट
भारतीय मजदूर संघ (इंटक) ने केंद्र सरकार द्वारा लाए जा रहे नए श्रम कानूनों पर गहरी चिंता जताई है। इंटक के राष्ट्रीय महासचिव विजय कामले ने कहा है कि प्रस्तावित कानूनों से नियोक्ताओं को मनमाने ढंग से छंटनी करने की खुली छूट मिल जाएगी, जिससे लाखों श्रमिकों के हितों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।
उन्होंने विशेष रूप से इस बात पर चिंता व्यक्त की कि नए कानून में 300 से कम श्रमिकों वाले प्रतिष्ठानों के लिए अनिवार्यता सीमा को कम करने का प्रस्ताव है। कामले का मानना है कि इस बदलाव से छोटे और मझोले उद्योगों में काम करने वाले लाखों श्रमिकों की नौकरी की सुरक्षा खतरे में पड़ जाएगी। यह सरकार की उस दिशा में बढ़ने की कोशिश को दर्शाता है जहाँ बड़े उद्योगपतियों और नियोक्ताओं को नियुक्ति और छंटनी के मामले में अधिक मनमानी करने की शक्ति दी जा रही है।
प्रस्तावित औद्योगिक संबंध संहिता पर सवाल उठाते हुए इंटक नेता ने कहा कि हड़ताल करने से पहले प्रबंधकों को 60 दिन पहले नोटिस देने की अनिवार्यता मजदूरों के लोकतांत्रिक अधिकारों को कमजोर करती है। उन्होंने जोर देकर कहा कि हड़ताल श्रमिकों के लिए अपनी मांगों को मनवाने का एक अंतिम और महत्वपूर्ण जरिया है। इस तरह की पाबंदियां लगाना अन्यायपूर्ण और श्रमिकों के हितों के खिलाफ है।
इसके अतिरिक्त, कामले ने प्रस्तावित कानूनों में महिला श्रमिकों के लिए पर्याप्त सुरक्षा प्रावधानों की कमी पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि महिला श्रमिकों की विशिष्ट आवश्यकताओं और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए स्पष्ट प्रावधानों का अभाव चिंताजनक है।
इंटक ने सरकार से मांग की है कि ऐसे महत्वपूर्ण कानूनों को देश भर में लागू करने से पहले सभी प्रमुख श्रम संगठनों के साथ व्यापक विचार-विमर्श किया जाए। कामले ने कहा कि श्रमिकों के अधिकारों और उनकी सुरक्षा को सर्वोपरि रखते हुए ही किसी भी श्रम कानून को अंतिम रूप दिया जाना चाहिए। यह सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है कि नए कानून श्रमिकों के कल्याण और सुरक्षा को मजबूत करें, न कि उन्हें कमजोर करें।
