“title”: “गोरखपुर: नौ साल पहले मृत घोषित महिला के नाम पर तीसरी बार बना फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र”,
“subtitle”: “जमीन हड़पने की नीयत से रची गई साजिश, पुलिस ने पिता-पुत्र व निगम कर्मियों पर दर्ज किया मुकदमा”,
“summary”: “गोरखपुर में जमीन पर अवैध कब्जे के इरादे से नौ वर्ष पूर्व मृत घोषित महिला के नाम पर तीसरी बार फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। पीड़ित की शिकायत पर पुलिस ने मामले की जांच करते हुए पिता-पुत्र और नगर निगम के कर्मचारियों के खिलाफ धोखाधड़ी और षडयंत्र का मुकदमा दर्ज किया है। एसएसपी के आदेश पर हुई इस कार्रवाई से सरकारी दस्तावेजों की प्रामाणिकता पर सवाल खड़े हो गए हैं।”,
“content”: “गोरखपुर में जमीनी विवाद को लेकर एक हैरान करने वाला मामला प्रकाश में आया है, जहाँ नौ वर्ष पूर्व मृत घोषित एक महिला के नाम पर तीसरी बार मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करवा लिया गया। यह गंभीर कृत्य कथित तौर पर जमीन हड़पने की नीयत से किया गया, जिसमें एक पट्टीदार ने अपने पिता के साथ मिलकर कथित तौर पर नगर निगम के कर्मचारियों की मिलीभगत से अंजाम दिया। पीड़ित पक्ष की शिकायत पर वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) के निर्देश पर कैंट थाना पुलिस ने संबंधित पिता-पुत्र और नगर निगम के कर्मचारियों के खिलाफ धोखाधड़ी और षडयंत्र रचने की धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया है।nnमामले के अनुसार, देवरिया के रुद्रपुर सोनबह मुस्तकिल निवासी ओमप्रकाश यादव ने पुलिस को दी अपनी तहरीर में बताया कि उनकी मां पुरनी देवी का निधन 31 अक्टूबर 2016 को हुआ था, जिसका एक वैध मृत्यु प्रमाण पत्र विकास खंड रुद्रपुर द्वारा जारी किया गया था। आरोप है कि नंदानगर के झरना टोला में रहने वाले उनके पट्टीदार योगेंद्र प्रताप यादव और उसके पिता गया प्रसाद ने जमीन पर कब्जा करने के इरादे से फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने का खेल शुरू किया।nnओमप्रकाश के मुताबिक, पहला फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र 12 अप्रैल 2019 को बनवाया गया था। शिकायत के बाद इसे 14 दिसंबर 2020 को निरस्त कर दिया गया था। इसके बावजूद, आरोपियों ने वर्ष 2020 में एक और फर्जी प्रमाण पत्र बनवा लिया, जिसे जांच में अवैध पाए जाने पर 13 अप्रैल 2023 को रद्द कर दिया गया। चौंकाने वाली बात यह है कि इसके बाद भी उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और 11 अगस्त 2025 की तारीख का एक तीसरा फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करवा लिया। पीड़ित ने यह भी आरोप लगाया है कि इस तीसरे फर्जी प्रमाण पत्र को जारी करवाने में नगर निगम के सुपरवाइजर और अन्य कर्मचारियों की संलिप्तता रही है।nnइस पूरे मामले पर पुलिस अधीक्षक (सिटी) अभिनव त्यागी ने बताया कि पीड़ित की तहरीर पर पिता-पुत्र और प्रमाण पत्र जारी करने में शामिल नगर निगम कर्मचारियों पर फर्जी दस्तावेज तैयार कर धोखाधड़ी और षडयंत्र की गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है। उन्होंने कहा कि साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। इस घटना ने सरकारी दस्तावेजों की सत्यता और उन्हें जारी करने वाली प्रणालियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाए हैं।”
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