डिजिटल अरेस्ट का शिकार, रिटायर अधिकारी से 4.32 करोड़ की ठगी
इंदौर से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहाँ एक सेवानिवृत्त मेडिकल अधिकारी को ठगों ने एक महीने तक ‘डिजिटल अरेस्ट’ पर रखकर 4 करोड़ 32 लाख रुपये की ठगी का शिकार बनाया है। यह ठगी एक सुनियोजित गैंग द्वारा की गई, जिसने खुद को भारतीय टेलीकॉम नियामक प्राधिकरण (ट्राई) का अधिकारी बताकर पीड़ित को फोन किया।
सूत्रों के अनुसार, ठगों ने पीड़ित को बताया कि उनके दो मोबाइल नंबरों का इस्तेमाल एक बड़े मनी लॉन्ड्रिंग रैकेट में किया जा रहा है। उन्होंने मुंबई से जुड़े 538 करोड़ रुपये के एक कथित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में पीड़ित को फंसाने की धमकी दी। ठगों ने पीड़ित के मोबाइल नंबर, आधार कार्ड नंबर और यहां तक कि जेट एयरवेज के मालिक नरेश गोयल के मामले में उनके बैंक खातों के इस्तेमाल का भी जिक्र किया, जिसके एवज में उन्हें कमीशन मिलने की बात कही गई।
पीड़ित को डराने के लिए, ठगों ने खुद को पुलिस और सुप्रीम कोर्ट का जज बताकर उनसे लगातार बातचीत की। उन्होंने पीड़ित को गिरफ्तारी, जेल और जांच के नाम पर डराया और वीडियो कॉल पर ही पूछताछ की। इस दौरान, उन्होंने पीड़ित की चल और अचल संपत्ति, जैसे बैंक खातों में जमा राशि, फिक्स्ड डिपॉजिट, शेयर, म्यूचुअल फंड, गहने, प्लॉट, मकान और फ्लैट की जानकारी भी हासिल कर ली।
ठगों ने एक नकली कोर्ट रूम का माहौल बनाया, जहाँ उन्होंने पीड़ित से पूछताछ की। पूछताछ के दौरान, उन्होंने नकली प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और पुलिस अधिकारियों को भी शामिल किया। पीड़ित पर केस चलाने का नाटक रचा गया और उन्हें एक नकली जज से बात भी करवाई गई। इस पूरी प्रक्रिया के दौरान, पीड़ित को यह विश्वास दिलाया गया कि वह एक गंभीर कानूनी जाल में फंस गए हैं।
लगभग एक महीने तक चली इस ठगी की वारदात में, आरोपियों ने पीड़ित से उसकी चल-अचल संपत्ति का सत्यापन करने के बहाने विभिन्न राज्यों जैसे गुजरात, गोवा, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और तेलंगाना के बैंक खातों में कुल 4 करोड़ 32 लाख रुपये जमा करवा लिए। यह घटनाक्रम पीड़ित के लिए बेहद तनावपूर्ण रहा, लेकिन वह ठगों के झांसे में आते रहे।
राज्य साइबर सेल ने इस मामले में तत्परता दिखाते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। यह गिरफ्तारी एक बड़ी सफलता मानी जा रही है, क्योंकि इस तरह की ठगी लोगों के लिए भारी आर्थिक और मानसिक बोझ का कारण बनती है। पुलिस मामले की आगे की जांच कर रही है और पीड़ित को न्याय दिलाने का प्रयास कर रही है। यह घटना आम लोगों को ऑनलाइन धोखाधड़ी के प्रति और अधिक सतर्क रहने की चेतावनी देती है।
