रमा निषाद का राजनीतिक उदय: वार्ड पार्षद से मंत्री तक का सफर
बिहार की राजनीति में एक बार फिर भाजपा ने अपने पारंपरिक अंदाज को बरकरार रखते हुए कई चौंकाने वाले निर्णय लिए हैं। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के मंत्रिमंडल में भाजपा कोटे से शामिल होने वाले नामों में मुजफ्फरपुर की औराई विधानसभा सीट से निर्वाचित रमा निषाद का नाम प्रमुख है। उन्हें पहली बार चुनकर आए विधायकों में से एक को मंत्री पद की जिम्मेदारी सौंपी गई है, जिसने राजनीतिक पंडितों को सोचने पर मजबूर कर दिया है।
रमा निषाद का राजनीतिक सफर किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं है। वह पूर्व सांसद अजय निषाद की पत्नी और पूर्व केंद्रीय मंत्री कैप्टन जयनारायण निषाद की बहू हैं। उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत हाजीपुर नगर परिषद में वार्ड पार्षद के तौर पर की थी। इसके बाद उन्होंने इसी नगर परिषद में उपाध्यक्ष और फिर चेयरमैन का पद संभाला। उनकी राजनीतिक पारी की शुरुआत अपने ससुर कैप्टन जयनारायण निषाद के मार्गदर्शन में हुई, जिन्होंने बाद में राजनीतिक विरासत अपनी बहू को सौंप दी।
इस बार के विधानसभा चुनाव में रमा निषाद के लिए राजनीतिक परिस्थितियां तेजी से बदलीं। वह मूल रूप से कुढ़नी विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही थीं। हालांकि, राजनीतिक समीकरणों में आए बदलाव के बाद, उन्होंने अपने पति अजय निषाद के साथ भाजपा की सदस्यता ग्रहण की। भाजपा ने उन्हें औराई विधानसभा सीट से अपना उम्मीदवार बनाया। शुरुआती विरोध के बावजूद, उन्होंने क्षेत्र की जनता का विश्वास जीता और सर्वाधिक मतों से विजयी हुईं।
रमा निषाद के मंत्री बनने के पीछे कई राजनीतिक समीकरणों को देखा जा रहा है। निषाद समाज को प्रतिनिधित्व देने और इस वर्ग को साधने की भाजपा की रणनीति का यह एक अहम हिस्सा माना जा रहा है। खासकर, इस क्षेत्र में विकास निषाद की सक्रियता और उनकी राजनीतिक शैली का मुकाबला करने के उद्देश्य से भी यह कदम उठाया गया होने की संभावना जताई जा रही है। रमा निषाद का यह राजनीतिक उत्थान दर्शाता है कि कैसे जमीनी स्तर की राजनीति से सीधे राष्ट्रीय राजनीति में अपनी पहचान बनाई जा सकती है।
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