लापरवाही पर निगम का सख्त रुख: पांच एजेंसियों पर काली सूची की तलवार
मुजफ्फरपुर नगर निगम शहर में खुले नालों पर स्लैब लगाने और जर्जर हो चुकी पुलियों की मरम्मत के कार्य में बरती जा रही लापरवाही पर सख्त हो गया है। निगम ने इस महत्वपूर्ण कार्य के लिए चयनित पांच निर्माण एजेंसियों को नोटिस जारी कर 24 घंटे के भीतर जवाब मांगा है। यदि जवाब संतोषजनक नहीं मिला, तो इन एजेंसियों को काली सूची में डाला जाएगा और भविष्य में किसी भी सरकारी कार्य के लिए डिबार कर दिया जाएगा।
सूत्रों के अनुसार, नगर निगम द्वारा निविदा प्रक्रिया के माध्यम से पांच एजेंसियों का चयन किया गया था, जिनमें से प्रत्येक को दस-दस वार्डों में विकास कार्य की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। जून माह में इन एजेंसियों को वर्क आर्डर जारी कर दिया गया था, लेकिन हैरानी की बात यह है कि अब तक उन्होंने आवंटित वार्डों में काम शुरू नहीं किया है। इस देरी और लापरवाही के कारण स्थानीय जनप्रतिनिधियों और आम नागरिकों ने निगम में लगातार शिकायतें दर्ज कराई हैं।
नगर निगम के कार्यपालक अभियंता ने कड़े शब्दों में कहा है कि बार-बार हिदायत के बावजूद एजेंसियों द्वारा कार्य में कोई प्रगति नहीं दिखाई गई है। उन्होंने कहा कि 19 जून को वर्क आर्डर मिलने के बाद से संबंधित जूनियर इंजीनियरों और असिस्टेंट इंजीनियरों से भी एजेंसियों का संपर्क नहीं हुआ है, जो कि अत्यंत चिंताजनक है। सात अगस्त को हुई एक समीक्षा बैठक में भी सभी एजेंसियों को अपने-अपने वार्डों के जूनियर इंजीनियरों से संपर्क कर कार्य शुरू करने का निर्देश दिया गया था, परंतु स्थिति जस की तस बनी हुई है।
आम जनता और जनप्रतिनिधियों द्वारा खुले नालों से होने वाली समस्याओं को लेकर लगातार शिकायतें मिल रही हैं, जिससे यह स्पष्ट है कि चयनित एजेंसियों द्वारा अपने कर्तव्यों का पालन ठीक से नहीं किया जा रहा है। इस निष्क्रियता के चलते, निगम ने इन एजेंसियों को अंतिम अवसर देते हुए जवाब तलब किया है।
जिन पांच एजेंसियों को नोटिस भेजा गया है, उनमें रेयांश इंफ्राकान लिमिटेड (वार्ड नंबर 01 से 10), मे. श्रीनिवास ट्रेडर्स (वार्ड नंबर-11 से 20), मेसर्स पटसारा कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड (वार्ड नंबर 21 से 30), मेसर्स श्रद्धा सर्विसेज (वार्ड नंबर 31 से 40) और मेसर्स प्रूडेंट मैनेजमेंट सर्विसेज (वार्ड नंबर 41 से 49) शामिल हैं। निगम प्रशासन का यह कड़ा कदम शहर में विकास कार्यों में गुणवत्ता और समयबद्धता सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।
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